झारखंड: महिला को नौकरी में शत प्रतिशत आरक्षण, हाईकोर्ट में सुनवाई हुई पूरी, फैसला रखा सुरक्षित

Jharkhand: 100% reservation for women in jobs; High Court hearing completes, decision reserved

झारखंड हाई कोर्ट में महिला के पदों पर शत-प्रतिशत आरक्षण को लेकर सुनवाई पूरी हो गई है। सरकार और याचिकाकर्ताओं के बीच संवैधानिक प्रावधानों को लेकर तीखी बहस हुई, जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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रांची। रांची में महिला सुपरवाइजर पदों पर 100 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर झारखंड हाई कोर्ट में गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले ने न सिर्फ राज्य, बल्कि पूरे देश में आरक्षण व्यवस्था और संवैधानिक प्रावधानों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

सरकार का पक्ष: महिलाओं से जुड़ा पद, इसलिए आरक्षण जायज
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने दलील दी कि महिला सुपरवाइजर का पद विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े कार्यों के लिए बनाया गया है। यह पद गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और महिला समूहों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।सरकार ने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 15(3) के तहत महिलाओं के हित में विशेष प्रावधान बनाए जा सकते हैं। इसलिए इस पद को पूरी तरह महिलाओं के लिए आरक्षित करना संवैधानिक रूप से सही है।सरकार के समर्थन में अधिवक्ता राजेंद्र कृष्ण और इंद्रजीत सिन्हा ने भी कहा कि केंद्र और अन्य राज्यों में भी इस तरह की व्यवस्थाएं लागू हैं और यह महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जरूरी है।

विपक्ष का तर्क: 100% आरक्षण समानता के खिलाफ
वहीं, न्याय मित्र अनूप मेहता और अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने सरकार के इस तर्क का कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि किसी भी पद को शत-प्रतिशत आरक्षित करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
उन्होंने अनुच्छेद 16 का हवाला देते हुए कहा कि जब नियुक्ति की बात आती है, तो समान अवसर का अधिकार लागू होता है। ऐसे में किसी एक वर्ग के लिए पूरी तरह आरक्षण देना अन्य योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन है।

पहले भी उठा था सवाल, अब खंडपीठ में फैसला
गौरतलब है कि इस मामले में पहले एकल पीठ ने भी यह महत्वपूर्ण सवाल उठाया था कि क्या किसी पद को पूरी तरह महिलाओं के लिए आरक्षित किया जा सकता है। इसी आधार पर मामले को खंडपीठ के समक्ष भेजा गया था।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में केवल महिलाओं से आवेदन मांगना ही असंवैधानिक है और इससे समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित होता है।

JSSC भर्ती और विवाद की जड़
यह पूरा मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा बाल कल्याण विभाग में महिला सुपरवाइजर के 421 पदों पर भर्ती के विज्ञापन से जुड़ा है।याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, क्योंकि उनकी शैक्षणिक योग्यता विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप नहीं मानी गई। जबकि नियुक्ति नियमावली में इस तरह की सख्ती का प्रावधान स्पष्ट नहीं है।सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि क्या योग्यता और आरक्षण दोनों को मिलाकर उम्मीदवारों के साथ न्याय हो रहा है या नहीं।

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