शिक्षकों का हंगामा: मुख्यमंत्री के सामने शिक्षकों ने काटा बवाल, संबोधन में अच्छी घोषणाएं नहीं होने पर भड़के, खुद मुख्यमंत्री को संभालना पड़ा मोर्चा…
Teachers' uproar: Teachers created a ruckus in front of the Chief Minister, got angry when there were no good announcements in the speech, the Chief Minister himself had to take charge...

Teacher News। मुख्यमंत्री के सामने ही शिक्षकों ने जमकर हंगामा किया। हंगामा बढ़ता देख, खुद मुख्यमंत्री शिक्षकों से मुखातिब हुए और उनसे ज्ञापन लिया। दरअसल शिक्षकों को उम्मीद थी, कि मुख्यमंत्री उनकी मांगों को लेकर भी कुछ घोषणा करेंगे। लेकिन, पूरे संबोधन में जब ऐसा नहीं हुआ, तो शिक्षकों ने सभा में ही हंगामा शुरू कर दिया।
मामला बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम का है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। जैसे ही उन्होंने अपना संबोधन समाप्त किया, वहां मौजूद मदरसा शिक्षक और कर्मचारी आक्रोशित हो उठे। उनका आरोप था कि सरकार ने मदरसों और शिक्षकों के हित में किसी तरह की ठोस घोषणा नहीं की, जबकि इसको लेकर उन्हें कार्यक्रम में बुलाया गया था।
शिक्षकों का कहना है कि वर्ष 2011 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वादा किया था कि प्रदेश के 2459 प्लस वन मदरसों के शिक्षकों को नियमित वेतनमान मिलेगा। लेकिन इतने सालों बाद भी उनमें से केवल 1659 मदरसों के अस्तित्व में रहने के बावजूद शिक्षकों को वेतन का लाभ नहीं मिल पाया।
इस मुद्दे को लेकर शिक्षकों ने हंगामा किया और पर्चे लहराकर अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि इतने सालों से वे भुखमरी का सामना कर रहे हैं और सरकार बार-बार वादाखिलाफी कर रही है।हालांकि, मुख्यमंत्री ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने शिक्षकों से ज्ञापन लिया और कहा कि यदि कोई समस्या है तो उसका समाधान जरूर किया जाएगा।
नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में दावा किया कि 2005 में जब एनडीए की सरकार बनी थी, तभी से राज्य में विकास का कार्य शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि 2005 से पहले मुस्लिम समाज के लिए कोई ठोस काम नहीं हुआ था, लेकिन उनकी सरकार ने कब्रिस्तानों की घेराबंदी करवाई और मुस्लिम समाज की सुविधाओं के लिए योजनाएं लागू कीं।
सीएम ने भागलपुर दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि 1989 के दंगे के बाद कई लोगों ने उनसे शिकायत की थी। उन्होंने कहा कि जब उनकी सरकार बनी तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की कोशिश की गई।
महिलाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं लागू की गई हैं। तलाकशुदा महिलाओं के लिए 24 हजार रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। उन्होंने मुस्लिम पुरुषों से अपील की कि वे अपनी पत्नियों को तलाक न दें, क्योंकि इससे महिलाओं को भारी परेशानी होती है।
इसके अलावा, नीतीश कुमार ने पेंशन योजना का जिक्र करते हुए कहा कि पहले पेंशन की राशि 400 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 1100 रुपये किया गया है। उन्होंने कहा कि समाज की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा।