धनतेरस के शुभ मुहुर्त में अब बस कुछ ही मिनट का बचा है वक्त, इस समय के भीतर कर लें खरीदी, जानिये कितने बजे तक है मुहूर्त ..
Only a few minutes are left for the auspicious time of Dhanteras, make your purchases within this time, know till what time the auspicious time is.

Dhanteras 2025 Shubh Muhurat: आज पूरे देश में धनतेरस का त्योहार हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन दीपावली की पंचदिवसीय श्रृंखला की शुरुआत का प्रतीक है। धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन शुभ मुहूर्त में खरीदारी करने से घर में धन, स्वास्थ्य और समृद्धि का वास होता है।
बजे तक शुभ काल रहेगा। इस दौरान झाड़ू, पीतल का कलश, सूखा धनिया, कुबेर यंत्र और दिवाली पूजा से जुड़ी वस्तुएं खरीदना श्रेष्ठ माना गया है।
धनतेरस का शुभ समय और पूजा का मुहूर्त (Dhanteras 2025 Shubh Muhurat):
हिंदू पंचांग के अनुसार, धनतेरस का पर्व कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस वर्ष 2025 में धनतेरस की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:16 बजे से रात 08:20 बजे तक रहेगा। इस समय मां लक्ष्मी, भगवान धनवंतरी और कुबेर देव की संयुक्त पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन इन तीनों की आराधना से धन-धान्य और सुख-समृद्धि में तेरह गुना वृद्धि होती है।
धनतेरस पर खरीदारी के शुभ मुहूर्त (Dhanteras 2025 Shopping Muhurat):
धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में की गई खरीदारी को दीर्घकालिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष तीन प्रमुख शुभ काल खरीदारी के लिए बताए गए हैं:
1. पहला मुहूर्त (लाभ काल):
शाम 05:48 बजे से 07:23 बजे तक का समय लाभदायक माना गया है। इस दौरान घर के लिए नए बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान या जरूरत के वस्त्र खरीदना शुभ रहेगा।
2. दूसरा मुहूर्त:
शाम 06:11 बजे से रात 08:41 बजे तक सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के या धातु से जुड़े वस्त्रों की खरीदारी के लिए उत्तम समय रहेगा। कहा जाता है कि इस समय खरीदा गया चांदी का सिक्का मां लक्ष्मी और गणेश जी का आशीर्वाद लाता है।
3. तीसरा मुहूर्त (शुभ काल):
रात 08:57 बजे से 10:32 बजे तक शुभ काल रहेगा। इस दौरान झाड़ू, पीतल का कलश, सूखा धनिया, कुबेर यंत्र और दिवाली पूजा से जुड़ी वस्तुएं खरीदना श्रेष्ठ माना गया है।
धनतेरस का धार्मिक महत्व (Significance of Dhanteras):
धनतेरस का त्योहार भगवान धनवंतरी के प्रकट होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान धनवंतरी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण उन्हें आयुर्वेद का जनक और देवताओं का वैद्य कहा जाता है।
इस दिन लोग भगवान धनवंतरी की आराधना करते हैं ताकि परिवार में स्वास्थ्य, दीर्घायु और रोगमुक्ति बनी रहे। साथ ही कुबेर देव और मां लक्ष्मी की पूजा से घर में धन और समृद्धि के द्वार खुलते हैं।








