झारखंड- शिक्षकों का वेतन बढ़ेगा: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, चार सप्ताह के भीतर आदेश का करना होगा पालन, कोर्ट ने कहा…

Jharkhand: Teachers' salaries to be increased: High Court issues major decision, order to be followed within four weeks, court says...

रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने शिक्षकों के वेतनमान से संबंधित एक अहम मामले में राज्य शिक्षा विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं। झारखंड हाई कोर्ट ने शिक्षा विभाग को आदेश दिया है कि जिन शिक्षकों को अब तक मैट्रिक अप्रशिक्षित वेतनमान दिया जा रहा है, उन्हें चार सप्ताह के भीतर प्रशिक्षित वेतनमान और सभी वित्तीय लाभ प्रदान किए जाएं। मामला शिक्षिका द्रोपदी कुमारी एवं अन्य की अवमानना याचिकाओं से संबंधित है।

 

जस्टिस संजय प्रसाद की एकल पीठ ने सोमवार को सुनवाई करते हुए कहा कि जिन शिक्षकों को अब तक मैट्रिक अप्रशिक्षित वेतनमान दिया जा रहा है, उन्हें चार सप्ताह के भीतर मैट्रिक प्रशिक्षित वेतनमान के साथ सभी वित्तीय लाभ प्रदान किए जाएं।यह आदेश शिक्षिका द्रोपदी कुमारी एवं अन्य शिक्षकों द्वारा दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि शिक्षा विभाग हाई कोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद अब तक प्रशिक्षित वेतनमान का लाभ नहीं दे रहा है।

 

कोर्ट में सचिव और निदेशक की उपस्थिति

सुनवाई के दौरान अदालत के आदेशानुसार शिक्षा विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह और माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद अदालत में उपस्थित हुए। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ रंजन ने कहा कि विभाग बार-बार कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर रहा है और शिक्षकों को उनके योग्य वेतनमान से वंचित रखा गया है।उन्होंने बताया कि विभाग को कई बार लिखित रूप में आदेशों की याद दिलाई गई, लेकिन अब तक प्रशिक्षित वेतनमान लागू नहीं किया गया।

 

सरकार की ओर से सफाई

राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने अदालत को बताया कि शिक्षा विभाग ने 7 दिसंबर 2024 को पारित आदेशों के अनुपालन का निर्णय पहले ही ले लिया है। उन्होंने कहा कि कुछ याचिकाकर्ताओं ने अपने पेंशन से संबंधित दस्तावेज और पीपी नंबर उपलब्ध नहीं कराए हैं, जिसके कारण कुछ मामलों में सत्यापन प्रक्रिया लंबित है।उन्होंने यह भी बताया कि विभाग चरणबद्ध तरीके से सभी शिक्षकों को वेतनमान का लाभ देने की दिशा में कार्य कर रहा है।

कोर्ट के निर्देश

जस्टिस संजय प्रसाद ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि विभाग को सभी आवश्यक दस्तावेजों का शीघ्र सत्यापन कर चार सप्ताह के भीतर प्रशिक्षित वेतनमान का भुगतान सुनिश्चित करना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता शिक्षकों को विभागीय जांच और सत्यापन में पूर्ण सहयोग देना होगा ताकि किसी भी प्रकार की देरी न हो।

 

कोर्ट ने आगे कहा कि यदि किसी शिक्षक के दस्तावेज अधूरे हैं, तो उन्हें संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के समक्ष जाकर जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए ताकि प्रक्रिया पूरी की जा सके।

 

अगली सुनवाई 19 नवंबर को

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी बकाया राशि और वेतनमान लाभों का भुगतान चार सप्ताह के भीतर कर दिया जाए। इसके बाद इस मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2025 को निर्धारित की गई है।फिलहाल कोर्ट ने सचिव और निदेशक को अगली सुनवाई तक व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी है, लेकिन चेतावनी दी है कि यदि आदेशों का अनुपालन नहीं हुआ, तो उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

ashrita

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