झारखंड- खुले मे मटन-चिकन बिक्री पर लगा बैन, राज्य सरकार ने जारी किया आदेश, सभी सिविल सर्जनों को भेजे आदेश में कहा….

Jharkhand: Ban imposed on the sale of mutton and chicken in the open; the state government has issued an order, instructing all civil surgeons...

रांची। झारखंड में अब खुले में मटन-चिकन बिक्री पर कड़ी कार्रवाई होगी। राज्य सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को निर्देश जारी कर खाद्य सुरक्षा कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। यह आदेश झारखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है।

विभाग ने राज्य के सभी सिविल सर्जनों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का अक्षरशः पालन कराया जाए और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विभागीय उप सचिव सीमा कुमारी उदयपुरिया द्वारा जारी आदेश पत्र में कहा गया है कि यह निर्देश झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा श्यामानंद पांडेय बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य मामले में पारित आदेश के आलोक में दिए जा रहे हैं।

कोर्ट के निर्देशों के बाद विभाग ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को सख्त करने का निर्णय लिया है, ताकि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता न हो।आदेश के तहत राज्य के सभी खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थानीय नगर निकायों के साथ समन्वय स्थापित कर मटन बिक्री और पशु वध से संबंधित नियमों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करें।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी पाए जाने पर न केवल दुकानदारों, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि अब मटन विक्रेता केवल उन्हीं शर्तों पर व्यवसाय कर सकेंगे, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियम, 2011 के तहत निर्धारित हैं।

इसके लिए संबंधित दुकानदारों को विधिवत पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण के मटन की बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि मटन की बिक्री से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि पशु वध पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (वधशाला नियम), 2001 के अनुरूप ही किया गया हो।

विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा नियम 2011 के शेड्यूल-4 (भाग-4) के प्रावधानों का अक्षरशः और भावनात्मक रूप से पालन करना अनिवार्य बताया गया है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों को गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

चिंताजनक बात यह है कि कई जिलों और नगर निगम क्षेत्रों में फिलहाल कोई अधिकृत वधशाला संचालित नहीं है, जबकि इन क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक मटन की दुकानें चल रही हैं।

अधिकांश दुकानदार अपनी दुकानों या आसपास ही पशु वध कर मटन बेचते हैं, जिससे न केवल स्वच्छता प्रभावित हो रही है, बल्कि आसपास का वातावरण भी दूषित हो रहा है। शहरी इलाकों, रिहायशी क्षेत्रों और बाजारों में खुलेआम बकरे का वध किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

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