झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश : “1 महीने के भीतर 24 इमारतों को करें ध्वस्त” DC-SSP को सख्त निर्देश, आदेश का पालन नहीं हुआ, तो होगी अवमानना की कार्रवाई

Jharkhand High Court issues major order: "Demolish 24 buildings within one month." Strict instructions given to the DC and SSP; failure to comply will result in contempt of court proceedings.

जमशेदपुर। झारखंड में एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई देखने को मिलेगी। झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 24 प्रमुख अवैध इमारतों को एक महीने के भीतर ढ़ाहने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने चेतावनी दी है कि आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर में लंबे समय से जारी अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामलों पर ये आदेश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश देते हुए जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी (JNAC) को आदेश दिया है कि शहर में चिन्हित अवैध इमारतों के खिलाफ तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की जाए।

हाईकोर्ट ने कहा है कि जमशेदपुर के विभिन्न इलाकों में स्थित 24 प्रमुख अवैध इमारतों को एक महीने के भीतर ध्वस्त किया जाए।

अदालत ने साफ किया है कि जिन भवनों का निर्माण स्वीकृत नक्शे से अलग किया गया है या जो बिना किसी वैध अनुमति के बनाए गए हैं, उनके अवैध हिस्सों को हर हाल में हटाया जाना अनिवार्य है।

JNAC के डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर को व्यक्तिगत जिम्मेदारी
कोर्ट ने इस मामले में JNAC के डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि अदालत के आदेशों का अक्षरशः पालन हो। खंडपीठ ने चेतावनी दी है कि यदि आदेश के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी पाई गई, तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

प्रशासन और पुलिस को सहयोग का निर्देश
हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया को निर्बाध रूप से पूरा करने के लिए राज्य के नगर विकास सचिव, जमशेदपुर के उपायुक्त (DC) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को भी निर्देश दिया है कि वे ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान आवश्यक प्रशासनिक सहयोग और पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराएं।

कोर्ट का मानना है कि अतिक्रमण हटाने के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका रहती है, ऐसे में प्रशासन और पुलिस की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है।

अंतरिम आदेश रद्द, कार्रवाई का रास्ता साफ
इस मामले में एक अहम फैसला लेते हुए हाईकोर्ट ने अपने सभी पूर्व अंतरिम आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनके चलते अब तक अवैध निर्माणों पर कार्रवाई रुकी हुई थी। अंतरिम आदेश हटने के बाद अब प्रशासन के पास बुलडोजर चलाने और अतिक्रमण हटाने का पूरा अधिकार और रास्ता साफ हो गया है।

अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अवैध निर्माण न केवल शहर की नियोजित विकास व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनते हैं। बिना अनुमति या नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए भवन भविष्य में बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं। ऐसे में इन पर सख्त कार्रवाई समय की मांग है।

शहर में मचा हड़कंप
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद जमशेदपुर में अवैध निर्माण कराने वालों में हड़कंप मच गया है। जिन इमारतों को चिन्हित किया गया है, उनके मालिकों में चिंता का माहौल है। वहीं, आम नागरिकों और शहरी नियोजन से जुड़े लोगों ने कोर्ट के इस फैसले को शहर के सुव्यवस्थित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

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