झारखंड- घूसखोर दारोगा को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने जमानत याचिका कर दी खारिज, 10000 रुपये घूस लेते हुए थे गिरफ्तार

Jharkhand: Corrupt sub-inspector denied relief, court rejects bail plea; he was arrested while accepting a bribe of Rs. 10,000.

रांची। घूसखोर दारोगा को कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल पायी है। 10 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार दारोगा श्याम नंदन पासवान की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है।

एसीबी की विशेष अदालत ने श्याम नंदन पासवान ने जमानत के लिए याचिका दायर की थी। दरअसल ट्रक की एमवीआई जांच कराने के नाम पर 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में एसीबी की कार्रवाई को कोर्ट ने गंभीर माना है।

एसीबी की विशेष अदालत ने आरोपी दारोगा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। दारोगा श्याम नंदन पासवान ने 13 जनवरी को विशेष अदालत में जमानत के लिए याचिका दायर की थी। उन्होंने कोर्ट से यह दलील दी कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है और जांच में सहयोग करने के लिए वे तैयार हैं।

हालांकि, एसीबी की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और केस डायरी के अवलोकन के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और फिलहाल उसे राहत देना उचित नहीं है। एसीबी ने दारोगा श्याम नंदन पासवान को 9 जनवरी को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी एक ट्रक चालक की शिकायत के आधार पर की गई थी।

शिकायतकर्ता ने एसीबी को बताया था कि उसकी 12 चक्का ट्रक बेड़ों थाना क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। दुर्घटना के बाद ट्रक को सड़क से हटाने और आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआई) जांच कराना आवश्यक था।शिकायत के अनुसार, इसी एमवीआई जांच को कराने के एवज में दारोगा श्याम नंदन पासवान द्वारा 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी जा रही थी।

शुरुआत में ट्रक चालक ने पैसे देने से इनकार कर दिया, लेकिन इसके बाद आरोपी दारोगा द्वारा बार-बार फोन कर दबाव बनाया जाने लगा। शिकायतकर्ता ने बताया कि पैसे नहीं देने पर उसे कार्रवाई में फंसाने और जांच प्रक्रिया को लटकाने की धमकी भी दी जा रही थी।लगातार दबाव और उत्पीड़न से परेशान होकर ट्रक चालक ने एसीबी से संपर्क किया और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत की प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद एसीबी ने जाल बिछाया। योजना के तहत शिकायतकर्ता को तयशुदा रकम के साथ आरोपी के पास भेजा गया, जहां रिश्वत लेते ही एसीबी की टीम ने दारोगा को रंगे हाथों पकड़ लिया।गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

Related Articles