झारखंड- 804 हेडमास्टरों पर गिरी गाज : शिक्षा विभाग की नाफरमानी पड़ेगी महंगी, 804 स्कूलों के हेडमास्टर पर गिरी गाज, शो-कॉज जारी, विभागीय कार्रवाई की चेतावनी

Jharkhand: 804 headmasters face consequences: Disobedience to the education department will prove costly; 804 school headmasters face consequences; show-cause notices issued; departmental action threatened

झारखंड में स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान के लिए चल रहे शिशु पंजी सर्वे में लापरवाही बरतने वाले 804 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने इन स्कूलों से स्पष्टीकरण मांगा है और विभागीय कार्यवाही की चेतावनी दी है।

Jharkhand School News : शिक्षकों के खिलाफ सख्त तैयारी करने की तैयारी शुरू हो गया है। शिशु पंजी सर्वे में लापरवाही में कई स्कूलों के हेडमास्टर विभाग की राडार पर आ गये हैं। राज्य में स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से झारखंड शिक्षा परियोजना ने शिशु पंजी सर्वेक्षण शुरू की थी।

लेकिन इस सर्वे को कई स्कूलों के हेडमास्टरों ने गंभीरता से नहीं लिया। अब इस गंभीर लापरवाही को लेकर राज्य के 804 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक स्कूलों ने शिशु पंजी सर्वेक्षण की अनिवार्य पूर्व प्रक्रिया हैबिटेशन मैपिंग का कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा नहीं किया। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने ऐसे सभी विद्यालयों की पहचान कर ली है और संबंधित प्रधानाध्यापकों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की जाएगी।

परिषद की तरफ से दी गयी जानकारी के मुताबिक हैबिटेशन मैपिंग से संबंधित डाटा को डहर-2 पोर्टल पर 6 दिसंबर तक अपलोड किया जाना था, लेकिन 804 स्कूलों ने इस निर्देश का पालन नहीं किया। इनमें सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालय दोनों शामिल हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि राज्य के कुल 96.6 प्रतिशत स्कूलों ने लक्ष्य के अनुरूप हैबिटेशन मैपिंग का कार्य पूरा कर लिया है।

फिलहाल झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने शिशु पंजी सर्वेक्षण की समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब सभी स्कूलों को यह सर्वे 15 फरवरी तक अनिवार्य रूप से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। अब तक राज्य के 19,060 स्कूलों ने शिशु पंजी सर्वे का कार्य पूरा कर लिया है, जो कुल लक्ष्य के विरुद्ध 55.4 प्रतिशत उपलब्धि को दर्शाता है।

वर्तमान स्थिति के अनुसार 12,253 स्कूलों में शिशु पंजी सर्वे का कार्य जारी है, जबकि 3,065 स्कूलों ने अब तक इस सर्वे की शुरुआत भी नहीं की है। परिषद ने ऐसे विद्यालयों को शीघ्र कार्य प्रारंभ करने का सख्त निर्देश दिया है।

आपको बता दें कि पहली बार डहर 2.0 पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से किए जा रहे इस डिजिटल शिशु पंजी सर्वे के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक बताए जा रहे हैं। अब तक 24,140 आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान की जा चुकी है। इनमें वे बच्चे शामिल हैं जो बाल मजदूरी में फंसे थे, अनाथ थे या एकल अभिभावक के साथ रह रहे थे।

इसके अलावा घुमंतू और प्रवासी परिवारों के बच्चे, ईंट-भट्ठों, होटल-ढाबों, रेलवे स्टेशनों पर काम करने वाले, भीख मांगने को मजबूर बच्चे, सफाई कर्मियों के बच्चे तथा अन्य कारणों से स्कूल छोड़ चुके बच्चे भी इस सूची में शामिल हैं।

डिजिटल माध्यम से हो रहा है शिशु पंजी सर्वे
शिशु पंजी सर्वे को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए इस बार डहर 2.0 (Digital Application for Holistic Action Plan and Review for Out of School Children) नामक मोबाइल और वेब आधारित एप्लीकेशन विकसित किया गया है।

इसके माध्यम से 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की स्कूल में नामांकन स्थिति, ड्रॉपआउट और स्कूल से बाहर होने के कारणों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।

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