शिक्षकों को लेकर सरकार की दो टूक, नहीं मिलेगी कोई छूट, TET पास करना ही होगा, संसद में सरकार के रूख के बाद अब शिक्षक क्या करेंगे….
The government's clear stance on teachers: no exemptions will be granted, they must pass the TET. What will teachers do now after the government's stance in Parliament?

शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर संसद में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए स्पष्ट जवाब के बाद देश भर के शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से पूर्ण छूट की उम्मीद को बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि टीईटी न्यूनतम अनिवार्य योग्यता बनी रहेगी और सामूहिक छूट की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
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Teacher TET News : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर शिक्षकों की परेशानी बढ़ने वालीहै। खासकर संसद में केंद्र सरकार के रुख के बाद लाखों शिक्षकों के बीच बेचैनी और असमंजस की स्थिति बन गई है।
खासकर वे शिक्षक, जो 2011 से पहले नियुक्त हुए थे और वर्षों से टीईटी से छूट की उम्मीद लगाए बैठे थे, उन्हें सरकार के जवाब से गहरा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि टीईटी शिक्षकों के लिए न्यूनतम अनिवार्य योग्यता बनी रहेगी और इससे सामूहिक रूप से किसी को छूट देने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
संसद में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री जयन्त चौधरी ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी। उन्होंने बताया कि निश्शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई), 2009 की धारा 23 के तहत राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को यह अधिकार दिया गया है कि वह कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करे।
इसी के तहत एनसीटीई ने 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना में टीईटी को अनिवार्य योग्यता के रूप में शामिल किया था।
केंद्र सरकार ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि टीईटी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को दिए गए एक अहम फैसले में टीईटी को शिक्षकों के लिए अनिवार्य योग्यता माना है। इस फैसले के अनुसार, जिन सेवारत शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से अधिक का समय शेष है, उन्हें निर्णय की तिथि से दो वर्ष के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा।
वहीं, जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से कम समय बचा है, उन्हें टीईटी पास किए बिना सेवानिवृत्ति तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी गई है। हालांकि, ऐसे शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण किए बिना पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे। सरकार के इस जवाब के बाद उत्तर प्रदेश में लगभग 1.86 लाख ऐसे शिक्षक, जिन्होंने अभी तक टीईटी पास नहीं की है, उनके बीच फिर से बेचैनी बढ़ गई है।
शिक्षक संगठनों ने सरकार के इस रुख पर नाराजगी जताई है। अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सह-संयोजक और उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि शिक्षकों को उम्मीद थी कि केंद्र सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी और कानून बनाकर टीईटी से राहत देगी। लेकिन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर किसी भी तरह की ठोस राहत देने से इनकार कर दिया।
वहीं, शिक्षक संघ के वरिष्ठ नेता निर्भय सिंह का कहना है कि शिक्षक पहले ही वर्षों की सेवा देकर अपनी योग्यता और अनुभव साबित कर चुके हैं। बढ़ती उम्र, पारिवारिक जिम्मेदारियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच फिर से परीक्षा की तैयारी करना शिक्षकों के लिए मानसिक तनाव का कारण बन रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए भविष्य में कोई सकारात्मक निर्णय लेगी।









