डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा, सभी राज्यों को UPSC के गाईडलाइन का पालन करना जरूरी
The Supreme Court made a significant observation regarding the appointment of the Director General of Police (DGP), stating that all states must follow the UPSC guidelines.

Supreme Court News : DGP की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को कहा कि नियमित डीजीपी की नियुक्ति के मामले में राज्यों और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के बीच स्पष्ट टकराव की स्थिति दिखाई दे रही है। सुनवाई के दौरान तमिलनाडु का विशेष मामला भी सामने आया. राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी विल्सन ने पक्ष रखा।
पीठ ने फरवरी 2026 में तेलंगाना के डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े अपने हालिया फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी राज्यों और UPSC को प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश के पैरा 10 से 12 में निर्धारित प्रक्रिया ही नियुक्ति का मानक है और इसकी अनदेखी से चयन प्रक्रिया में जटिलताएं पैदा हो रही हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि तमिलनाडु के वर्तमान कार्यवाहक DGP स्वयं नियमित डीजीपी पद के उम्मीदवार हैं। नियमों के अनुसार, जो अधिकारी उम्मीदवार हो, वह चयन पैनल का हिस्सा नहीं बन सकता। अदालत ने कहा कि कार्यवाहक डीजीपी के उम्मीदवार होने से चयन समिति में राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए।
तय की गई समय सीमा
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को अनुमति दी कि चयन पैनल में राज्य की ओर से दो सदस्य हों, – एक मुख्य सचिव और दूसरा कार्यवाहक डीजीपी के स्थान पर कोई अन्य अधिकारी. यह वैकल्पिक अधिकारी रैंक और स्टेटस में कार्यवाहक डीजीपी से वरिष्ठ होना चाहिए।
Supreme Court ने इस प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समयसीमा भी तय की है. तमिलनाडु सरकार को एक सप्ताह के भीतर संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा, जबकि UPSC को उस प्रस्ताव पर अगले दो सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लेना होगा।
हम किसी व्यक्ति का चयन नहीं कर रहे
सुनवाई के दौरान जब कुछ वकीलों ने व्यक्तिगत तथ्यों पर बहस करनी चाही, तो मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट करते हुए कहा कि हमें व्यक्तिगत तथ्यों की चिंता नहीं है. हम यहां किसी खास व्यक्ति को DGP के रूप में नहीं चुन रहे हैं, बल्कि यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि नियुक्ति की प्रक्रिया सही और संवैधानिक हो. इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) के रूप में अदालत की सहायता की।









