धान की बंपर पैदावार चाहिए? तो भूलकर भी न करें बुआई से पहले यह गलती
Want a bumper crop of rice? Don't make this mistake before sowing.

धान की खेती शुरू करने वाले किसानों के लिए एक बेहद जरूरी और चेतावनी भरी खबर सामने आई है। कृषि विशेषज्ञों ने धान की बुवाई और रोपाई से ठीक पहले किसानों को “खैरा रोग” (Khaira Disease) को लेकर अलर्ट किया है। अगर शुरुआत में ही इस बीमारी पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह धान की पैदावार को सीधे आधा यानी 50% तक कम कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह रोग धान की फसल को अंदर से खोखला और कमजोर बना देता है, जिससे पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है।
कैसे पहचानें खैरा रोग? (मुख्य लक्षण)
शुरुआत में किसान इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन सही समय पर पहचान न होने से पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
पत्तियों का रंग बदलना: धान की पत्तियां हल्की पीली पड़ने लगती हैं।
धब्बे दिखना: कुछ समय बाद पत्तियों पर कत्थई या लाल-भूरे रंग के छोटे-छोटे धब्बे साफ दिखाई देने लगते हैं।
बौना पौधा: पौधे का विकास पूरी तरह रुक जाता है, वह बौना रह जाता है और उसकी जड़ें भी मिट्टी में ठीक से नहीं फैल पाती हैं।
क्या है इस बीमारी की मुख्य वजह?
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, धान में खैरा रोग लगने की सबसे बड़ी वजह मिट्टी में जिंक (जस्ते) की भारी कमी होना है। जब मिट्टी में जिंक का लेवल कम होता है, तो पौधे जरूरी पोषक तत्व नहीं ले पाते। यह समस्या सबसे ज्यादा नर्सरी तैयार करते समय या रोपाई के तुरंत बाद देखने को मिलती है।
बचाव के अचूक उपाय: विशेषज्ञों की सलाह
इस घातक बीमारी से फसल को बचाने का सबसे सही समय रोपाई से ठीक पहले का होता है। किसानों के लिए नीचे दिए गए कदम उठाना बेहद जरूरी है:
1. रोपाई से पहले (परमानेंट इलाज)
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करवाएं। खैरा रोग को रोकने के लिए जिंक सल्फेट का इस्तेमाल सबसे अचूक और रामबाण उपाय है। खेत की आखिरी जुताई के समय प्रति एकड़ के हिसाब से सही मात्रा में जिंक सल्फेट मिट्टी में मिला देना चाहिए। इससे पौधों को शुरुआती स्टेज से ही पूरा पोषण मिलता है।
2. खड़ी फसल में लक्षण दिखने पर (तत्काल उपचार)
अगर रोपाई के बाद खड़ी फसल में खैरा रोग के लक्षण दिखाई दें, तो किसानों को तुरंत नीचे दिए गए घोल का छिड़काव करना चाहिए:
आपातकालीन छिड़काव: जिंक सल्फेट और बुझे हुए चूने का पानी में घोल बनाकर तुरंत खड़ी फसल पर स्प्रे करें।
बुवाई और रोपाई से पहले की गई थोड़ी सी सावधानी और जिंक का सही इस्तेमाल किसानों को भारी नुकसान से बचा सकता है और इस सीजन में बंपर पैदावार सुनिश्चित कर सकता है।









