Jharkhand Agriculture: किसानों के लिए दिल्ली में शिल्पी नेहा तिर्की ने उठाई बड़ी मांग, राइस फॉलो जमीन पर विशेष पैकेज से लेकर 90% सब्सिडी तक की पैरवी
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में झारखंड की कृषि मंत्री ने केंद्र के सामने रखीं राज्य की जरूरतें, 50 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त राइस फॉलो क्षेत्र में दलहन, तिलहन और बागवानी फसलें विकसित करने का प्रस्ताव

रांची/नई दिल्ली। झारखंड के किसानों से जुड़े कई अहम मुद्दे राष्ट्रीय स्तर के मंच पर उठे हैं। नई दिल्ली के राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, पूसा में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 में झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने राज्य की कृषि परिस्थितियों के अनुरूप केंद्र से विशेष सहयोग और नीतिगत लचीलेपन की मांग रखी। सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन में रबी सीजन की तैयारियों के साथ फसल विविधीकरण, जलवायु-अनुकूल खेती, डिजिटल कृषि और राइस फॉलो क्षेत्रों के बेहतर उपयोग पर चर्चा हुई।
कृषि मंत्री ने झारखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में कृषि योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप लागू करने के लिए केंद्र की ओर से आवश्यक नीतिगत लचीलापन और विशेष सहयोग मिलना जरूरी है। उन्होंने दलहन क्षेत्र के विस्तार को लेकर झारखंड की ओर से किए जा रहे प्रयासों को भी सम्मेलन में रखा।
राइस फॉलो क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज की मांग
शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि झारखंड में रबी के दौरान करीब 12 लाख हेक्टेयर भूमि राइस फॉलो क्षेत्र के रूप में उपलब्ध रहती है। उनके अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 5 से 6 लाख हेक्टेयर भूमि को दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के तहत लाने की क्षमता है।
उन्होंने इस संभावित भूमि के बेहतर उपयोग के लिए केंद्र से वित्तीय और तकनीकी सहायता वाला विशेष पैकेज देने का आग्रह किया। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में भी राइस फॉलो क्षेत्रों में फसल विविधीकरण, विशेष रूप से दलहन और तिलहन को बढ़ावा देने को रबी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
50 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि विकसित करने का प्रस्ताव
कृषि मंत्री ने आगामी रबी सीजन में राइस फॉलो क्षेत्रों की 50 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के तहत विकसित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने इसे राज्य में फसल विविधीकरण और किसानों की आय के नए अवसरों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने देवघर और दुमका में 1,000-1,000 हेक्टेयर के अरहर क्लस्टर का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह के मॉडल को राज्य के दूसरे क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जा सकता है। झारखंड सरकार पहले भी जलवायु और क्षेत्र विशेष के अनुसार फसल चयन पर जोर देती रही है।
पलांडू फार्म को राष्ट्रीय शोध संस्थान बनाने की मांग
मंत्री ने रांची के पलांडू स्थित फार्म रिसर्च सेंटर को नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हॉर्टिकल्चर एंड ट्राइबल फार्मिंग रिसर्च के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी केंद्र के सामने रखा। इसके लिए उन्होंने आधुनिक आधारभूत संरचना, शोध सुविधाओं और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की।
उनका कहना है कि इस तरह की संस्था के जरिए बागवानी और जनजातीय कृषि पद्धतियों पर उच्चस्तरीय शोध को बढ़ावा मिल सकता है। इससे झारखंड की स्थानीय कृषि परिस्थितियों और जनजातीय क्षेत्रों में अपनाई जाने वाली खेती से जुड़े शोध एवं तकनीकी विकास को संस्थागत आधार मिलने की संभावना है।
छोटे किसानों के लिए 90 प्रतिशत सब्सिडी की मांग
झारखंड में छोटे, सीमांत और आदिवासी किसानों की बड़ी संख्या का हवाला देते हुए कृषि मंत्री ने सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन के तहत कृषि उपकरणों पर सब्सिडी बढ़ाने की मांग रखी।
उन्होंने कहा कि छोटे किसानों के लिए कृषि मशीनरी की लागत एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में कृषि उपकरणों पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलने से छोटे और सीमांत किसानों के लिए मशीनीकरण को अपनाना आसान हो सकता है।
किसान आईडी की अनिवार्यता में छूट की मांग
सम्मेलन में AgriStack के तहत किसान आईडी बनाने में आ रही व्यावहारिक समस्याओं का मुद्दा भी उठाया गया। मंत्री ने कहा कि झारखंड में पुराने भूमि रिकॉर्ड और वर्तमान जमीनी स्थिति में अंतर होने के कारण कई किसानों की किसान आईडी तैयार करने में दिक्कतें आ रही हैं।
उन्होंने मांग की कि जब तक राज्य में बड़े पैमाने पर किसान आईडी निर्माण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इसे PM-KISAN समेत अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनिवार्य शर्त नहीं बनाया जाए और आवश्यक छूट दी जाए।
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में किसान रजिस्ट्री और डिजिटल कृषि को रबी अभियान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
KCC कवरेज बढ़ाने पर जोर
कृषि मंत्री ने झारखंड में किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC कवरेज की धीमी प्रगति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने केंद्र से बैंकों को सभी पात्र किसानों को KCC से जोड़ने के लिए समयबद्ध सैचुरेशन अभियान चलाने का आग्रह किया।
उनके अनुसार, पात्र किसानों को समय पर KCC से जोड़ने से संस्थागत कृषि ऋण तक उनकी पहुंच आसान हो सकती है और खेती के लिए आवश्यक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय पर जोर
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में शिल्पी नेहा तिर्की ने झारखंड की कृषि जरूरतों के अनुरूप केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को झारखंड आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन में राज्यों के कृषि मंत्रियों को अपनी प्राथमिकताएं और सुझाव रखने का अवसर दिया गया। रबी अभियान 2026 में फसल विविधीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि, डिजिटल कृषि, किसान रजिस्ट्री, दलहन और तिलहन उत्पादन तथा कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष चर्चा हुई।
झारखंड कृषि विभाग के अनुसार, राज्य में बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित गतिविधियों में संभावनाएं हैं। विभाग इन क्षेत्रों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से जोड़ने पर भी जोर देता रहा है।









