जयराम महतो का नाम सुन आगबबूला हो गए 3 विधायक, राज्यपाल के भाषण के बीच दीक्षांत समारोह छोड़कर निकल गए बाहर
Jharkhand: A new controversy erupted during the convocation ceremony, with three MLAs storming out during the Governor's address.

धनबाद। बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह उस वक्त असहज स्थिति बन गई, जब राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष गंगवार के संबोधन के बीच तीन विधायक कार्यक्रम छोड़कर बाहर निकल गए। दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल मंच से छात्रों को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो, धनबाद विधायक राज सिन्हा और टुंडी विधायक मथुरा महतो अचानक कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर चले गए।
बाहर निकलने के बाद विधायक राज सिन्हा और मथुरा महतो ने मीडिया के सामने अपनी नाराजगी भी जाहिर की।विधायकों के नाराज होने की वजह राज्यपाल के संबोधन से जुड़ी बताई जा रही है। अपने भाषण के दौरान राज्यपाल संतोष गंगवार ने डुमरी विधायक जयराम महतो का नाम मंच से लिया, लेकिन कार्यक्रम में मौजूद अन्य तीनों विधायकों का नाम नहीं लिया गया।
हालांकि, राज्यपाल ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के सीनेट मेंबर्स का उल्लेख जरूर किया था। तीनों नाराज विधायक सीनेट के सदस्य भी हैं।इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक मथुरा महतो ने कहा कि मंच से संबोधन में नाम लेने या न लेने का निर्णय राज्यपाल का है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “जिन्हें जानते हैं, उन्हीं का नाम लेंगे।”
वहीं विधायक राज सिन्हा ने नाराजगी से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “हमें तो बुलाया ही नहीं गया था, हम तो मेला देखने आ गए थे।”
महामहिम को ऐसा लगता है कि मैं अपने क्षेत्र में कार्य को लेकर एक्टिव हूँ इसलिए उन्होंने मेरा नाम लिया बाकी तीनों विधायक नाराज हो गए इसमें मेरा कोई कारण है @JLKMJHARKHAND pic.twitter.com/a4gqyjf7Gu
— Tiger jairam mahto – inquilabi (@JairamTiger) December 26, 2025
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर विधायक जयराम महतो ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि तीनों विधायक सीनेट के सदस्य हैं और राज्यपाल ने सीनेट मेंबर्स का सामूहिक रूप से संबोधन किया है, जिससे उनका नाम स्वतः शामिल हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वे सीनेट के सदस्य नहीं हैं, इसलिए संभवतः राज्यपाल ने उनका नाम अलग से लिया। जयराम महतो ने इसे अपना सौभाग्य बताते हुए कहा कि राज्यपाल उन्हें एक सक्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में जानते हैं और पहले भी सम्मान देते रहे हैं। कुल मिलाकर, एक अकादमिक कार्यक्रम के दौरान हुए इस घटनाक्रम ने राजनीतिक संवेदनशीलता और प्रोटोकॉल से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसकी चर्चा अब समारोह से बाहर सियासी मंचों पर हो रही है।









