17 फरवरी से शुरू होने जा रहा है महाभयंकर अशुभ अग्नि पंचक, अगले 5 दिन क्यों माने जा रहे हैं संवेदनशील? ये काम बिल्कुल ना करें…

The dreadful and inauspicious Agni Panchak is about to begin on February 17th. Why are the next five days considered sensitive? Avoid these things...

हिंदू पंचांग में 17 फरवरी 2026 से पंचक काल शुरू हो रहा है। इस बार मंगलवार से शुरू होने के कारण अग्नि पंचक कहलाएगा। यह पंचक 21 फरवरी 2026 की शाम 7:07 बजे समाप्त होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक इस दौरान कुछ कार्यों को टालने और सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
________________________________________
Panchak 17th February : हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में पंचक काल को विशेष महत्व है। प्रत्येक माह में चंद्रमा की विशेष स्थिति के आधार पर बनने वाला पंचक काल धार्मिक दृष्टि से काफी संवेदनशील समय माना जाता है। फरवरी 2026 में पंचक 17 फरवरी, मंगलवार को प्रातः 09:05 बजे से प्रारंभ होकर 21 फरवरी 2026, शनिवार की शाम 07:07 बजे तक रहेगा।

जानकारी के मुताबिक इस बार पंचक की शुरुआत मंगलवार से हो रही है, इसलिए इसे अग्नि पंचक कहा जा रहा है। पुराणों में पंचक का स्वरूप सप्ताह के जिस दिन से इसकी शुरुआत होती है, उसी आधार पर निर्धारित किया जाता है। मंगलवार से प्रारंभ होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है, जिसे सतर्कता और सावधानी का समय माना जाता है।

जानिये पंचक क्या होता है?
हिंदू पंचांग में जब चंद्रमा क्रमशः धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से होकर गुजरता है, तब उस अवधि को पंचक कहा जाता है। यह काल सामान्यतः लगभग पांच दिनों का होता है। धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं में इस समय को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना गया है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचक चार प्रकार के बताए जाते हैं – राज पंचक, चोर पंचक, अग्नि पंचक और मृत्यु पंचक। इनमें अग्नि पंचक को आग, दुर्घटना या तकनीकी कार्यों से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी का संकेत माना जाता है।

पंचक में वर्जित माने जाने वाले कार्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक काल में कुछ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। इस दौरान लकड़ी से जुड़े कार्य, जैसे पलंग, चारपाई या फर्नीचर बनवाना अशुभ माना जाता है। घर की छत बनवाना या बड़े निर्माण कार्यों की शुरुआत से भी परहेज करने की बात कही जाती है।

इसके अलावा विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्यक्रमों को भी इस अवधि में टालने की परंपरा है। मान्यता है कि पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा से बचना चाहिए, क्योंकि इसे यम की दिशा माना गया है।विशेष रूप से अग्नि पंचक में औजार, मशीनरी या जोखिम वाले कार्यों की शुरुआत को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

सूर्य ग्रहण के साथ बन रहा संयोग
मान्यताओं के अनुसार वर्ष 2026 के पहले सूर्य ग्रहण के दिन के आसपास अग्नि पंचक का आरंभ होना एक विशेष संयोग माना जा रहा है। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण को भी शुभ कार्यों के लिए वर्जित समय माना गया है।

ग्रहण काल और सूतक अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या नया व्यापार शुरू करने से बचने की परंपरा रही है।हालांकि, यह सभी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पंचक को भय का नहीं, बल्कि सावधानी का संकेत मानना चाहिए।

Related Articles