झारखंड: विमान हादसे को लेकर आयी बड़ी अपडेट, विमान में ना तो तो CVR था और ना ही FDR, चार साल तक बंद रहा था ये विमान, 2022 में रेडबर्ड ने खरीदा था…

Jharkhand: Major update on the plane crash. The plane had neither a CVR nor an FDR. The plane had been out of service for four years and was purchased by Redbird in 2022.

चतरा। झारखंड विमान हादसे की सच्चाई शायद कभी नहीं सामने आ पाये। चतरा में हुए एयर एंबुलेंस हादसे की चल रही जांच से जुड़ी एक बड़ी अपडेट आयी है। शुरुआती जांच में जो जानकारी आ रही है, वो काफी चौकाने वाली है। जांच टीम को दुर्घटनाग्रस्त रेडबर्ड के BE C90 विमान में न तो कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) मिला और ना ही फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) मिला है। जांच एजेंसियों के लिए CVR और FDR का अभाव एक बड़ी बाधा बन सकता है।

जानकारी के मुताबिक विमानन नियमों के मुताबिक, इस श्रेणी और वजन वाले छोटे विमानों में इन उपकरणों की अनिवार्यता नहीं होती, लेकिन इनके अभाव में हादसे की तकनीकी जांच अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इस दुर्घटना में कुल सात लोगों की मौत हुई थी। जो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुई है, उसका निर्माण 1987 में हुआ था। वर्ष 2022 में रेडबर्ड एयरवेज ने इसे ओरिएंट फ्लाइंग स्कूल से खरीदा था।

विमान 2018 से 2022 तक अनयूज्ड रहा। हालांकि, इतने लंबे समय तक उपयोग में न रहने के कारणों पर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टता नहीं मिल सकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक निष्क्रिय रहे विमानों के पुनः संचालन से पहले विस्तृत तकनीकी निरीक्षण और मेंटेनेंस प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन बेहद जरूरी होता है।

अमूमन होता ऐसा है कि अगर कोई उपकरण कॉकपिट में हुई बातचीत, चेतावनियों और उड़ान के दौरान दर्ज तकनीकी पैरामीटर्स का डेटा उपलब्ध कराते हैं, जिससे दुर्घटना के कारणों का सटीक विश्लेषण संभव हो पाता है। अब जांच टीमों को मलबे, मेंटेनेंस लॉग, एयर ट्रैफिक कम्युनिकेशन, मौसम संबंधी डेटा और अन्य सहायक साक्ष्यों पर अधिक निर्भर रहना होगा।

इस बीच, नागरिक उड्डयन क्षेत्र में नियामक निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में महाराष्ट्र में एक हाई-प्रोफाइल लियरजेट दुर्घटना के बाद नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने चार्टर ऑपरेटर्स के लिए स्पेशल ऑडिट का आदेश दिया था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रेडबर्ड के विमानों का उस विशेष ऑडिट के तहत निरीक्षण हुआ था या नहीं। नियामक की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक बयान अभी तक जारी नहीं किया गया है।

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