Dhanbad News : नीरज सिंह हत्याकांड में इंस्पेक्टर निरंजन तिवारी व पब्लिक प्रोस्क्यूटर की बढ़ेगी मुश्किलें ? कोर्ट ने जारी किया नोटिस, अगले महीने कोर्ट में होना होगा हाजिर..

Dhanbad News: Will problems increase for Inspector Niranjan Tiwari and Public Prosecutor in Neeraj Singh murder case? Court issued notice, will have to appear in court next month..

धनबाद। बहुचर्चित नीरज सिंह हत्याकांड मामले में कोर्ट ने पूर्व विधायक संजीव सिंह और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। इस मामले में फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश ने केस के विवेचक इंस्पेक्टर निरंजन तिवारी और सरकारी वकील सत्येंद्र कुमार राय को फर्जी साक्ष्य और गवाह पेश करने के आरोप में नोटिस जारी किया है। अब दोनों को अदालत में जवाब देना होगा।

 

इससे पहले जिला एवं सत्र न्यायाधीश 16 एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने पूर्व विधायक संजीव सिंह समेत अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों से आरोप साबित नहीं होते। फैसले के बाद अब केस के अनुसंधानकर्ता इंस्पेक्टर निरंजन तिवारी और विशेष लोक अभियोजक (पीपी) सत्येंद्र कुमार राय की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

 

अदालत ने दोनों को नोटिस जारी किया है। आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता अभिषेक सिंह के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज और गवाह तैयार किए, ताकि संजीव सिंह को कठोर सजा, यहां तक कि फांसी दिलाई जा सके।

 

फर्जी दस्तावेज और सीडीआर का मामला

पूर्व विधायक संजीव सिंह की ओर से उनके वकील मो. जावेद ने अदालत में धारा 344 के तहत आवेदन दिया था। इसमें कहा गया कि विवेचक ने पुलिस अधिकारी होने के बावजूद शपथ लेकर अदालत में कई ऐसी बातें दर्ज कराईं, जो जांच रिपोर्ट में शामिल नहीं थीं। इतना ही नहीं, सरकारी वकील ने भी शिकायतकर्ता के साथ मिलकर कोर्ट में फर्जी सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) पेश किया।

 

वकील ने आरोप लगाया कि मुखबिर से लेकर पुलिस और यहां तक कि सरकार भी इस मामले में पूर्व विधायक को सजा दिलाने के लिए पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रही थी। हालांकि अदालत ने साफ कर दिया कि यहां केवल साक्ष्य और तथ्यों के आधार पर ही न्याय होगा।

 

अदालत का कड़ा रुख

कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी का काम केवल निष्पक्ष जांच करना और उसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना है। किसी भी अधिकारी को आरोपियों को सजा दिलाने के लिए साजिश रचने या फर्जी दस्तावेज पेश करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने विवेचक और पीपी दोनों को नोटिस जारी कर अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है।

 

न्यायपालिका पर भरोसा

फैसले के बाद संजीव सिंह के वकील ने कहा कि यह आदेश साबित करता है कि अदालत में केवल न्याय की ही जीत होती है। उन्होंने कहा कि यह मामला इस बात का उदाहरण है कि चाहे पुलिस या अभियोजन पक्ष कितना भी दबाव क्यों न बनाए, अदालत निष्पक्ष रहकर केवल तथ्यों के आधार पर ही निर्णय लेती है।

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