Dhanbad News: SNMMCH में देर रात बवाल, मरीज की मौत के बाद बौखलाये परिजनों ने डाक्टरों की कर दी धुनाई, हड़ताल पर गये डाक्टर्स

Dhanbad News: Late night ruckus in SNMMCH, after the death of the patient, the agitated relatives thrashed the doctors, doctors went on strike

धनबाद। शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज (एसएनएमएमसीएच) में देर रात बवाल मच गया। मरीज की मौत के बाद परिजनों ने आपातकालीन विभाग में जमकर हंगामा किया और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों की पिटाई कर दी। इस घटना में आधा दर्जन डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके विरोध में जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए, जिससे आपातकालीन सेवाएं बाधित हो गईं।

 

जानकारी के मुताबिक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आपातकालीन विभाग में तोड़फोड़ और हंगामा किया। इसी दौरान ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों को भीड़ ने घेरकर पीटना शुरू कर दिया। इस हमले में करीब आधा दर्जन डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

 

जूनियर डाक्टर्स हड़ताल पर

घटना से आक्रोशित होकर जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया। सभी डॉक्टर इमरजेंसी विभाग के सामने धरने पर बैठ गए और सुरक्षा की मांग उठाई। जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि जब तक अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन ठोस कदम नहीं उठाते, आंदोलन जारी रहेगा। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी होते हुए भी वहां अक्सर पुलिसकर्मी मौजूद नहीं रहते। यही वजह है कि असामाजिक तत्व बिना डर अस्पताल में घुसकर मारपीट कर देते हैं।

 

सेवाएं ठप, मरीज परेशान

हड़ताल की वजह से अस्पताल में आपातकालीन सेवाएं ठप हो गईं। कई गंभीर मरीजों को इलाज नहीं मिल पाया और उन्हें वापस लौटना पड़ा। कुछ मरीजों के परिजनों ने एम्बुलेंस न मिलने की शिकायत की और इसी नाराजगी में डॉक्टरों के साथ हाथापाई की थी। इसका सीधा असर आम मरीजों पर पड़ा, जिन्हें इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा।

 

प्रशासन की कोशिश

घटना की सूचना मिलते ही सरायढेला थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने की कोशिश की। इसके अलावा अस्पताल अधीक्षक डॉ. डीके गंधोरिया और प्रबंधन के अन्य अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने जूनियर डॉक्टरों को शांत करने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

 

बार-बार दोहराई जा रही घटनाएं

डॉक्टरों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उनके साथ मारपीट की गई हो। आए दिन ऐसे मामले सामने आते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। डॉक्टरों का कहना है कि यदि मरीज के परिजन इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हैं, तो उसे विधिक प्रक्रिया के तहत उठाना चाहिए, लेकिन मारपीट किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

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