झारखंड : कैसे होगा! विधायकों की डिजीटल ट्रेनिंग से 30 माननीय रहे गायब, पेपरलेस विधानसभा की तैयारी हुई तेज, मुख्यमंत्री ने कही ये बात…
Jharkhand: How will it be? 30 honorable members were absent from the digital training for MLAs, preparations for a paperless assembly accelerated, the Chief Minister said this...

झारखंड विधानसभा में बजट सत्र से बड़ा बदलाव दिखेगा। विधानसभा में अब विधायक डिजिटल होने वालेहैं। NeVA परियोजना के तहत सदन की कार्यवाही को पेपरलेस बनाने के लिए विधायकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। हालांकि, प्रशिक्षण कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही।
रांची। झारखंड विधानसभा में अब विधायक हाथों में कागज का पुलिंदा नहीं, बल्कि टेबलेट लिये दिखेंगे। झारखंड विधानसभा को पूरी तरह पेपरलेस बनाने की दिशा में पहल शुरू हो गई है। स्पीकर रबींद्रनाथ महतो के नेतृत्व में राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) परियोजना के तहत सदन की कार्यवाही और विधायी प्रक्रियाओं के डिजिटाइजेशन की कवायद तेज हो गई है।
विधानसभा परिसर में विधायकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उन्हें डिजिटल विधायी कार्यों और नई तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई।
विधायकों का प्रशिक्षण और टैब वितरण
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विधायकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने के लिए तैयार करना था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, स्पीकर रबींद्रनाथ महतो सहित कई मंत्री और विधायक उपस्थित रहे। प्रशिक्षण में शामिल 46 विधायकों को टैबलेट वितरित किए गए, ताकि वे डिजिटल माध्यम से प्रश्न, सूचना और प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकें।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस अवसर पर विधानसभा में ई-विधान सेवा केंद्र का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि झारखंड अब डिजिटल युग के साथ कदम मिलाने के लिए तैयार है। सीएम ने कहा,”देश तेजी से डिजिटलाइजेशन की ओर बढ़ रहा है। अब सदन के कमरों में कागजों के ढेर और फाइलों के बंडल नहीं दिखेंगे। यह झारखंड के लिए गर्व का क्षण है।”
35 विधायक प्रशिक्षण में नहीं पहुंचे
जहां एक ओर डिजिटाइजेशन की पहल को लेकर उत्साह दिखा, वहीं दूसरी ओर 35 विधायकों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। इनमें मंत्री और प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी भी शामिल रहे।
संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर दिल्ली में होने के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। कई विधायकों ने क्षेत्रीय व्यस्तताओं या राजधानी से बाहर होने का हवाला दिया।
बजट सत्र से आंशिक डिजिटल कार्यवाही
स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने जानकारी दी कि आगामी बजट सत्र से सदन की कार्यवाही को आंशिक रूप से डिजिटल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे सभी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन लाया जाएगा।प्रशिक्षण के दौरान यह निर्णय भी लिया गया कि शून्य काल की सूचनाएं ऑनलाइन स्वीकार की जाएंगी। इसके तहत निर्धारित समय सीमा में वेबसाइट खुलेगी और पहले दर्ज 25 सूचनाएं ही मान्य होंगी।
लाइन में लगने से मिलेगी राहत
डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद विधायकों को शून्य काल या अन्य सूचनाओं के लिए देर रात तक लाइन में खड़े रहने की समस्या से मुक्ति मिलेगी। स्पीकर ने कहा कि यह व्यवस्था पारदर्शिता और सुविधा दोनों सुनिश्चित करेगी।
डिजिटलाइजेशन के फायदे और चुनौतियां
स्पीकर महतो ने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान के तहत सभी विधानसभाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे कार्यप्रणाली में एकरूपता आएगी और सदन की गतिविधियों को डिजिटली ट्रैक किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी डिजिटल परिवर्तन के साथ आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने साइबर सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि तकनीक के साथ सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना भी जरूरी है।
भविष्य की दिशा
NeVA परियोजना के तहत विधानसभा में प्रश्नकाल, सूचनाएं, प्रस्ताव और कार्यवाही का पूरा प्रबंधन डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। सरकार और विधानसभा सचिवालय के बीच समन्वय स्थापित कर इस पहल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।









