झारखंड- शिक्षा विभाग में अंधेरगर्दी: BRP-CRP को वेतनवृद्धि का लाभ नहीं मिलने से परियोजना निदेशक नाराज, अफसरों को पत्र भेजकर दिया सख्त निर्देश, बोले, लापरवाही बर्दाश्त नहीं
Jharkhand- Malpractice in the Education Department: Project Director angry over BRP-CRP not getting the benefit of salary hike, sent a letter to the officers and gave strict instructions, said, negligence will not be tolerated.

Jharkhand Education Department News : शिक्षा विभाग की अंधेरगर्दी किसी से छुपी नहीं है। सरकार के आदेश को भी अधिकारी ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। ऐसा ही मामला समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत प्रखंड साधन सेवी (बीआरपी) और संकुल साधन सेवी (सीआरपी) को लेकर भी सामने आया है। जिनके तीन प्रतिशत वार्षिक मानदेय वृद्धि का आदेश जारी किया जा चुका है, बावजूद कई जिलों में इसका लाभ बीआरपी और सीआरपी को नहीं मिल रहा है।
जिसे लेकर अब राज्य परियोजना निदेशक ने नाराजगी जताई है। दरअसल आंदोलन के बाद सभी जिलों को मानदेय वृद्धि, ईपीएफ लाभ और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े निर्देश जारी किए गए हैं। प्रखंड साधन सेवी (बीआरपी) और संकुल साधन सेवी (सीआरपी) को उनके मानदेय में निर्धारित तीन प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का लाभ नहीं मिलने का मामला तूल पकड़ने के बाद अब राज्य परियोजना निदेशक स्तर पर पहुंच गया है।
विभिन्न जिलों के उपायुक्तों, जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) और जिला शिक्षा अधीक्षकों (डीएसई) की लापरवाही के कारण यह वृद्धि लंबे समय से लंबित रही, जिससे बीआरपी और सीआरपी में भारी असंतोष देखा गया।बीआरपी–सीआरपी के आंदोलन के बाद राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला शिक्षा अधीक्षकों को पत्र जारी किया है।
पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से खेद जताते हुए कहा है कि वर्ष 2024 में गठित नियमावली और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा समय-समय पर भेजे गए पत्रों के बावजूद अधिकांश जिलों में तीन प्रतिशत वार्षिक मानदेय वृद्धि की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, जो अत्यंत खेदजनक है। राज्य परियोजना निदेशक ने निर्देश दिया है कि सभी जिलों में आवश्यक प्रक्रिया अपनाते हुए प्रत्येक वर्ष मार्च माह तक बीआरपी और सीआरपी का परफॉर्मेंस अप्रेजल किया जाए और उसी के आधार पर उन्हें वार्षिक मानदेय वृद्धि का लाभ सुनिश्चित रूप से दिया जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस निर्देश का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए और इसकी जिम्मेदारी सीधे संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक की होगी। इस पत्र की प्रति सभी उपायुक्तों को भी भेजी गई है, ताकि जिला स्तर पर इसकी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
निदेशक ने जिलों को यह भी निर्देश दिया है कि मानदेय वृद्धि से संबंधित अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित समय-सीमा के भीतर राज्य परियोजना कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने साफ तौर पर संकेत दिया है कि आगे किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके अलावा, राज्य परियोजना निदेशक ने बीआरपी और सीआरपी को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) का लाभ देने से जुड़े मामलों पर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि जिन बीआरपी और सीआरपी का सेवा अवधि के दौरान निधन हो चुका है, उनके आश्रितों को ईपीएफ का लाभ दिलाने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज और जानकारियां ईपीएफ पोर्टल पर अपलोड कर आवेदन ईपीएफओ को अग्रसारित किया जाए।
निदेशक ने स्पष्ट किया है कि मृत बीआरपी और सीआरपी के आश्रितों से 30 दिनों के भीतर आवेदन प्राप्त किया जाए और आवेदन मिलने के 15 दिनों के भीतर उसे ईपीएफओ को भेजा जाए। साथ ही ईपीएफ और बीमा लाभ से संबंधित एक पंजी (रजिस्टर) भी अनिवार्य रूप से संधारित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इतना ही नहीं, नियमावली के आलोक में अनुकंपा आधारित नियुक्ति के प्रावधान को भी लागू करने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत यदि किसी बीआरपी या सीआरपी का सेवा अवधि के दौरान निधन होता है, तो आवश्यक शैक्षणिक अर्हता रखने वाले आश्रित को एक बार के लिए बीआरपी या सीआरपी के पद पर नियुक्ति दी जाएगी।









