झारखंड: क्या बागी कांग्रेसी विधायकों पर गिरने वाली है गाज ? या मंत्रियों की होगी छुट्टी… झारखंड कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान बनेगा बड़ा बवंडर

Jharkhand: Will the rebel Congress MLAs face action? Or will ministers be dismissed? The internal strife within the Jharkhand Congress will become a major storm.

रांची। झारखंड कांग्रेस में जल्द ही कुछ बड़ा विस्फोट होने जा रहा है। जिस तरह के बागी तेवर कांग्रेस के विधायकों के दिख रहे हैं, उससे तो यही साबित हो रहा है कि या तो कांग्रेस के मंत्रिमंडल में बदलाव होगा या फिर पांचों विधायकों पर गाज गिरेगी।

या फिर ऐसी भी स्थिति बन सकती है कि दोनों बातें एक साथ ही हो जाये। दरअसल पिछले काफी वक्त से संगठन और सरकार के बीच तालमेल को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।

पार्टी के पांच विधायकों के अलग गुट बनाकर मंत्रियों के खिलाफ आवाज उठाने से कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। पार्टी के कुल सोलह विधायकों में से पांच विधायक अपने उपनेता के साथ अलग गुट बनाकर न केवल पार्टी इकाई बल्कि सरकार में शामिल कांग्रेस कोटे के चारों मंत्रियों के खिलाफ बगावती तेवर अपनाए हुए हैं। इन विधायकों की नाराजगी इतनी बढ़ चुकी है कि वे आलाकमान से सीधे कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

इस घटनाक्रम ने सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर कांग्रेस की स्थिति और संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांचों विधायकों का आरोप है कि कांग्रेस कोटे के मंत्री न तो संगठन को पर्याप्त महत्व दे रहे हैं और न ही विधायकों की बातों को गंभीरता से ले रहे हैं। यही वजह है कि वे खुद को हाशिये पर महसूस कर रहे हैं।

हाल ही में रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर इन विधायकों ने मीडिया से बातचीत के दौरान खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की, जिससे पार्टी की अंदरूनी कलह सार्वजनिक हो गई।इस पूरे मामले पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधायकों का दिल्ली जाकर आलाकमान या केंद्रीय नेतृत्व से अपनी बात रखना गलत नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी विधायक को मंत्रियों की कार्यशैली से आपत्ति है, तो पार्टी के भीतर इस पर चर्चा हो सकती है। लेकिन जिस तरह से कुछ विधायकों ने मीडिया के सामने अपने ही मंत्रियों के खिलाफ बयानबाजी की है, वह पार्टी अनुशासन के खिलाफ है।

मुंजनी ने यह भी बताया कि प्रदेश प्रभारी राजू और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कई बैठकों में यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि आंतरिक मतभेदों को पार्टी मंच पर ही उठाया जाए, न कि मीडिया के जरिए।

वहीं, कांग्रेस अनुशासन समिति के सदस्य अभिलाष साहू ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट पर मीडिया से अपने ही मंत्रियों के खिलाफ की गई टिप्पणी को अनुशासनहीनता माना जाएगा।

हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनुशासन समिति के अध्यक्ष पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। समिति संबंधित विधायकों को बुलाकर उनसे बातचीत करेगी और यदि इसके बावजूद स्थिति नहीं सुधरी, तो पार्टी स्तर पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

इस पूरे विवाद के बीच पार्टी के भीतर एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि अनुशासनहीनता के बावजूद इन विधायकों के प्रति अब तक नरम रुख क्यों अपनाया गया है। सतीश पॉल मुंजनी ने इस संदर्भ में कहा कि मौजूदा समय कांग्रेस के लिए बेहद अहम है।

निकाय चुनाव नजदीक हैं और साथ ही एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से पहले हर बूथ पर मजबूत बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) तैयार करना पार्टी की प्राथमिकता है। उनका आरोप है कि भाजपा की रणनीति कांग्रेस समर्थक वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटवाने की है, जिसे रोकने के लिए संगठन की एकजुटता बेहद जरूरी है।

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