3 अप्रैल को झारखंड बंद: 2 अप्रैल को मशाल जुलूस, तीन को झारखंड बंद, मसीही समाज ने बंद की तारीख बदलने की मांग की…
Jharkhand Bandh on April 3: Torch procession on April 2, Jharkhand Bandh on April 3, Christian community demands change of bandh date...

झारखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर बीजेपी ने 3 अप्रैल को बंद का ऐलान किया है, लेकिन गुड फ्राइडे के दिन आंदोलन को लेकर ईसाई संगठनों ने विरोध दर्ज कराया है।
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रांची। झारखंड की सियासत इन दिनों कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर गरमाई हुई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राज्यव्यापी आंदोलन और झारखंड बंद का ऐलान कर दिया है। रांची स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल सहदेव ने सरकार पर तीखा हमला बोला और विष्णुगढ़ की घटना को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि विष्णुगढ़ की घटना में पुलिस तब सक्रिय हुई, जब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल मौके पर पहुंचा। इससे यह साफ होता है कि राज्य का पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में असफल साबित हो रहा है।
बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। इसके तहत 2 अप्रैल को राज्य के सभी प्रखंडों और जिला मुख्यालयों में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। इसके बाद 3 अप्रैल को झारखंड बंद का आह्वान किया गया है। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के खिलाफ जनता की आवाज उठाने के लिए किया जा रहा है।
हालांकि, बीजेपी के इस बंद को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है। 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे होने के कारण ईसाई समुदाय ने इस बंद का कड़ा विरोध किया है। रांची के डंगरा टोली स्थित वाईडब्ल्यूसीए में ऑल इंडिया क्रिश्चियन माइनॉरिटी फ्रंट झारखंड प्रदेश, ऑल चर्चेस कमेटी यूथ विंग, झारखंड क्रिश्चियन यूथ एसोसिएशन और यंग वीमेंस क्रिश्चियन एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर अपनी आपत्ति जताई।
ईसाई संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि जिस घटना के विरोध में बंद बुलाया गया है, उसकी वे निंदा करते हैं, लेकिन गुड फ्राइडे के दिन बंद बुलाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि यह दिन ईसाई समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण और शोक का दिन होता है, जब बड़ी संख्या में लोग चर्च में प्रार्थना के लिए एकत्रित होते हैं। ऐसे में बंद के कारण धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
संगठनों ने बीजेपी से बंद की तारीख बदलने की मांग की है। उनका कहना है कि संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है, इसलिए किसी भी आंदोलन या बंद का आयोजन करते समय धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।








