झारखंड: भ्रष्ट अफसरों को कोर्ट ने सुनायी सजा, तीन अफसरों को 6-6 साल की जेल, जुर्माना, पेंशन से सरकारी खजाने के नुकसान की होगी रिकवरी
Jharkhand: Court sentences corrupt officials, sentences three officers to six years in prison, fines, and recovers losses to the government treasury from pensions.

सड़क निर्माण कार्य में अनियमितता के मामले में तीन अभियंताओं को अदालत ने दोषी ठहराया है। उन्हें सजा के साथ जुर्माना लगाया गया है और सरकार को हुए नुकसान की भरपाई भी उनसे की जाएगी।
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Jharkhand Court News। भ्रष्टाचार के मामले में कोर्ट ने तीन अफसरों कड़ी सजा सुनायी है। कोर्ट ने तीनों अफसरों को 6-6 साल की जेल के साथ-साथ डेढ़ लाख का जुर्माना लगाया है। यही नहीं सरकार को हुए नुकसान की भरपायी भी करने का आदेश दिया गया है। झारखंड के जामताड़ा जिले में सड़क निर्माण से जुड़े एक पुराने भ्रष्टाचार मामले में ये फैसला सुनाया गया है।
भ्रष्टाचार के मामले में कड़ा फैसला
पथ निर्माण विभाग द्वारा जामताड़ा-रूपनारायणपुर रोड के सतह नवीकरण कार्य में अनियमितता पाए जाने पर तीन अभियंताओं को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच के बाद धनबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने 31 जनवरी 2023 को अपना फैसला सुनाया था। अदालत ने तत्कालीन कार्यपालक अभियंता प्रकाश चंद्र सिंह, सहायक अभियंता एंथोनी तिग्गा और कनीय अभियंता नरेश प्रसाद सिंह को दोषी करार दिया।
जानिये कितनी सुनायी गयी है सजा
अदालत ने तीनों अभियंताओं को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 6-6 वर्ष की सजा और 1 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े मामलों में 5-5 वर्ष की अतिरिक्त सजा और 30 हजार रुपये का जुर्माना भी निर्धारित किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
सरकारी खजाने के नुकसान की होगी भरपायी
जांच के दौरान यह सामने आया कि सड़क के सतह नवीकरण कार्य में भारी अनियमितताएं की गई थीं, जिससे सरकार को कुल 9 लाख 30 हजार 850 रुपये का नुकसान हुआ। इस नुकसान की भरपाई के लिए पथ निर्माण विभाग ने तीनों दोषियों से बराबर-बराबर राशि वसूलने का निर्णय लिया है। विशेष रूप से सेवानिवृत्त कनीय अभियंता नरेश प्रसाद सिंह के मामले में विभाग ने उनकी पेंशन से राशि वसूलने का आदेश जारी किया है। इसके तहत उनकी पेंशन से पहली किस्त के रूप में 5283.33 रुपये काटे जाएंगे, जबकि शेष राशि 5000 रुपये की 61 मासिक किस्तों में वसूली जाएगी।
विशेष कोर्ट ने सुनाया है फैसला
यह मामला न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी कार्यों में लापरवाही और अनियमितता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभागीय स्तर पर भी इस तरह के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।इस कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट रूप से गया है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।









