झारखंड- शर्मनाक घटना: मां की हुई मौत, तो शव को घर में बंद कर बेटे हो गये फरार, 40 घंटे यूं ही पड़ा रहा शव, फिर अंतिम संस्कार …

Jharkhand- Shameful incident: When the mother died, the sons locked the body in the house and fled, the body lay there for 40 hours, then the last rites were performed...

Jharkhand News गढ़वा। जिस मां ने नौ महीने कोख में पालकर अपने बेटों को जन्म दिया, अपना पूरा जीवन उनके सुख-दुख के लिए समर्पित किया, उसी मां के अंतिम संस्कार से उसके बेटे मुंह मोड़ गए। यह दिल दहला देने वाला मामला गढ़वा जिले के भवनाथपुर पंचायत के बुका गांव के तीनकोनिया टोला से सामने आया है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया।

 

दरअसल 80 वर्षीय तेतरी देवी की डायरिया से मौत हो गई। पति हरचरन बियार का निधन पहले ही हो चुका था। मौत की सूचना मिलते ही तेतरी देवी के तीनों बेटे, बहुएं और पोते शव को घर में छोड़कर अपने-अपने परिवार के साथ वहां से भाग गए। लगभग 40 घंटे तक उनका शव घर में ही पड़ा रहा। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि परिवार का कोई सदस्य अंतिम संस्कार के लिए लौटेगा, लेकिन यह उम्मीद भी टूट गई।

 

ग्रामीणों ने संभाली जिम्मेदारी

घंटों इंतजार के बाद ग्रामीणों ने स्वयं अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। शुरू में जेसीबी से गड्ढा खोदकर शव को दफनाने की तैयारी हो रही थी, तभी जिला परिषद सदस्य शर्मा रंजनी और मुखिया बेबी देवी को जानकारी मिली।

 

उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए दफनाने से रोक दिया और कहा कि तेतरी देवी का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से ही होना चाहिए।इसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से तेतरी देवी का अंतिम संस्कार किया गया। गांव के ही रामलाल भुइयां ने मुखाग्नि दी, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिल सके।

 

डर की वजह से भाग गए बेटे

मृतका के बेटे बिंदू बियार ने स्वीकार किया कि डायरिया से मां की मौत के बाद संक्रमण के डर से पूरा परिवार गांव छोड़कर चला गया। डर की वजह से उन्होंने अंतिम संस्कार नहीं किया।

ग्रामीणों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में माता-पिता के निधन पर पुत्र द्वारा मुखाग्नि देने को सबसे बड़ा धर्म माना जाता है, क्योंकि इससे मृतात्मा को मोक्ष मिलता है। लेकिन तेतरी देवी के बेटों ने न सिर्फ इस कर्तव्य से मुंह मोड़ा, बल्कि मां की ममता और संस्कारों का भी अपमान किया।

ashrita

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