झारखंड हाईकोर्ट : दोस्त रही महिला कर्मचारी की आपत्तिजनक फोटो सोशल मीडिया पर की वायरल, कोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज, कहा, निजी संबंधों की आड़ में किसी को….

Jharkhand High Court: Objectionable photo of female employee who was a friend went viral on social media, court rejected bail plea, said, under the guise of personal relationship, someone…

Jharkhand Highcourt News : झारखंड हाई कोर्ट ने पूर्व महिला दोस्त की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल करने वाले आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया है। साइबर अपराध और महिला की निजता के गंभीर उल्लंघन से जुड़े इस मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि निजी संबंधों की आड़ में किसी की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाने का अधिकार किसी को नहीं है।

________________________________________
Jharkhand Highcourt News : अपनी पूर्व महिला दोस्त की फोटो सोशल मीडिया में वायरल करने वाले आरोपी को राहत देने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।

जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने विजय कुमार श्रीवास्तव द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला केवल दो व्यक्तियों के निजी संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक महिला की गरिमा, सम्मान और निजता पर सीधा हमला किया गया है, जिसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

साइबर अपराध और निजता के उल्लंघन से जुड़े इस गंभीर मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट के सामने पेश किये तथ्यों के अनुसार, आरोपित विजय कुमार श्रीवास्तव और पीड़िता के बीच पिछले कुछ वर्षों से आपसी संबंध थे।

बाद में संबंधों में खटास आने के बाद आरोपित ने कथित तौर पर पीड़िता को बदनाम करने की साजिश रची। आरोप है कि उसने पीड़िता के नाम से फर्जी ई-मेल आईडी और इंस्टाग्राम अकाउंट बनाकर उसके आपत्तिजनक फोटो और संदेश सोशल मीडिया व ई-मेल के माध्यम से प्रसारित किए।

साथ ही जांच में यह भी सामने आया कि यह आपत्तिजनक सामग्री केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि पीड़िता के कार्यस्थल एमिटी यूनिवर्सिटी के कुलपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई।

इससे न सिर्फ पीड़िता की सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, बल्कि उसके पेशेवर करियर को भी गंभीर रूप से प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

महिला ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर उससे 25 लाख रुपये की मांग की थी। इसके साथ ही, उस पर पति से तलाक लेने का दबाव भी बनाया गया। शिकायत के अनुसार, यह मानसिक उत्पीड़न लगातार चलता रहा, जिससे पीड़िता को गंभीर मानसिक आघात पहुंचा।साइबर थाना पुलिस द्वारा की गई जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

जांच में यह पुष्टि हुई कि फर्जी ई-मेल आईडी और सोशल मीडिया अकाउंट आरोपी के मोबाइल नंबर का उपयोग कर बनाए गए थे। पीड़िता की निजी और आपत्तिजनक तस्वीरें उसकी सहमति के बिना साझा की गईं।

खास बात यह रही कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी आरोपी ने पीड़िता को बदनाम करने की कोशिशें जारी रखीं।केस डायरी के अनुसार, एक स्वतंत्र गवाह ने धमकी, ब्लैकमेलिंग और तस्वीरें भेजे जाने की पुष्टि की है।

इसके अलावा, आरोपी द्वारा बनाए गए इंस्टाग्राम अकाउंट का यूजर नेम कई बार बदला गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह एक सुनियोजित साइबर अपराध था और आरोपी जांच से बचने की कोशिश कर रहा था।वहीं, आरोपी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि दोनों के बीच संबंध सहमति से थे और लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे हैं।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि प्राथमिकी पीड़िता द्वारा दबाव बनाने के उद्देश्य से दर्ज कराई गई है। अपनी दलील के समर्थन में आरोपी की ओर से वाट्सएप चैट, बैंक लेनदेन और यात्रा से जुड़े कुछ दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए।

सभी पक्षों को सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि भले ही दोनों के बीच कभी आपसी संबंध रहे हों, लेकिन इससे किसी व्यक्ति को दूसरे की निजता, गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाने का कोई अधिकार नहीं मिल जाता। अदालत ने यह भी कहा कि पीड़िता के विवाहित और समझदार महिला होने का तर्क आरोपी को उसके कृत्यों से मुक्त नहीं कर सकता।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत एक असाधारण राहत है, जिसे ऐसे गंभीर मामलों में सामान्य रूप से नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने माना कि यदि आरोपी को अग्रिम जमानत दी जाती है, तो इससे जांच प्रभावित होने की पूरी संभावना है।

इन सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने विजय कुमार श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

Related Articles