झारखंड: 17 शिक्षकों पर गिरी गाज, स्कूलों से गायब रहने वाले शिक्षकों को नोटिस, DSE ने पूछा, क्यों ना आपके खिलाफ कार्रवाई की जाये…
Jharkhand: 17 teachers in trouble, notice issued to teachers missing from schools, DSE asks why action should not be taken against you...

दुमका के जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) ने ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर कम उपस्थिति दर्ज कराने वाले 17 शिक्षकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। विभागीय निर्देशों की अवहेलना और कार्यदिवसों में कम उपस्थिति को गंभीर मानते हुए शिक्षकों को 12 फरवरी 2026 को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
________________________________________
दुमका। झारखंड के दुमका जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सख्त रुख अपनाता नजर आ रहा है। स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति और ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली में लापरवाही के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) ने 17 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
जानकारी के अनुसार, DSE कार्यालय की ओर से पूर्व में जारी निर्देशों—पत्रांक 490 दिनांक 30.04.24 तथा 26.06.24—के माध्यम से सभी प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों, सहायक अध्यापकों एवं शिक्षकेतर कर्मियों को ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर नियमित उपस्थिति दर्ज करने का आदेश दिया गया था।

इस डिजिटल प्रणाली का उद्देश्य स्कूलों में कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

हालांकि, विभाग द्वारा हाल ही में की गई समीक्षा में यह सामने आया कि कई शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति बेहद कम पाई गई। ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर 20 दिसंबर 2025 से 25 जनवरी 2026 तक की अवधि में कार्यदिवसों के आधार पर उपस्थिति का आकलन किया गया। समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, 17 शिक्षकों की उपस्थिति असामान्य रूप से कम रही, जिसे विभागीय निर्देशों की अवहेलना माना गया है।
नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शिक्षकों की कम उपस्थिति “अत्यंत खेदजनक” है और यह विभागीय आदेशों की अनदेखी को दर्शाती है।
DSE ने संबंधित शिक्षकों को निर्देश दिया है कि वे 17 फरवरी 2026 को विद्यालय अवधि के दौरान स्वयं कार्यालय में उपस्थित होकर वस्तुस्थिति से अवगत कराएं। साथ ही यह भी बताने को कहा गया है कि उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा क्यों न की जाए।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में नियमित उपस्थिति शिक्षण गुणवत्ता और छात्रों के हितों से सीधे जुड़ी है। यदि शिक्षक कार्यदिवसों में अनुपस्थित रहते हैं या ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली का पालन नहीं करते, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है।









