झारखंड: “पुलिस नरपिशाच बन चुकी है” जयराम महतो का पुलिस की कार्यशैली पर तीखा हमला, पुलिस एसोसिएशन ने किया पलटवार

Jharkhand: "The police have become vampires" - Jairam Mahto's scathing attack on the police's working style, the Police Association retaliated.

रामगढ़ के गोला कांड और उसके बाद हुई गिरफ्तारियों को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है। डुमरी विधायक जयराम महतो ने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाया है, जबकि झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने इन आरोपों का कड़ा विरोध करते हुए पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया है।
________________________________________
रांची। रामगढ़ जिले के गोला कांड और उसके बाद हुई गिरफ्तारियों को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। इस मामले में डुमरी से विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के अध्यक्ष जयराम महतो ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं दूसरी ओर झारखंड पुलिस एसोसिएशन के संयुक्त सचिव राकेश पांडेय ने इन आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए पुलिस बल का बचाव किया है।

क्या है गोला कांड?
यह पूरा विवाद 4 अक्टूबर 2024 की उस घटना से जुड़ा है, जब गोला थाना क्षेत्र में पुलिस की पीसीआर वैन की चपेट में आने से दो आदिवासी युवकों—अजीत हेम्ब्रम और सागर हेम्ब्रम—की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था और स्थानीय लोगों के साथ कई संगठनों के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था।

स्थानीय लोगों और जेएलकेएम कार्यकर्ताओं का आरोप था कि यह केवल दुर्घटना नहीं बल्कि पुलिस की लापरवाही का नतीजा था। इसी घटना के विरोध में गोला थाना का घेराव किया गया और कई स्थानों पर प्रदर्शन भी हुए। बाद में पुलिस ने इन प्रदर्शनों और कथित उपद्रव को लेकर मामला दर्ज किया।

जयराम महतो ने लगाए पक्षपात के आरोप
गिरफ्तारियों के बाद विधायक जयराम महतो ने पुलिस पर तीखा हमला बोला। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन में कई राजनीतिक दलों और संगठनों के लोग शामिल थे, लेकिन पुलिस ने केवल जेएलकेएम से जुड़े पदाधिकारियों को ही निशाना बनाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जेएलकेएम के संतोष महतो, देवानंद महतो, शिव नंदन मुंडा और शहबाज़ अनवर गोल्डी के खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। जयराम महतो ने कहा कि रामगढ़ में पुलिस का व्यवहार “नरपिशाच” जैसा हो गया है और निर्दोष लोगों को जेल भेजा जा रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। विधायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्दोष लोगों के साथ अन्याय हुआ है तो जनता समय आने पर इसका जवाब जरूर देगी।

पुलिस एसोसिएशन का कड़ा पलटवार
जयराम महतो के इन बयानों पर झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने कड़ी आपत्ति जताई है। एसोसिएशन के संयुक्त सचिव राकेश पांडेय ने कहा कि पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात हैं। ऐसे में उन्हें “नरपिशाच” कहना बेहद आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी कार्य में बाधा डालता है, उपद्रव करता है और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश करता है, तो क्या उसे क्रांतिकारी समाजसेवा कहा जाएगा? उन्होंने नेताओं से अपील की कि वे बयान देते समय पुलिसकर्मियों की गरिमा और मर्यादा का भी ध्यान रखें।

Related Articles