झारखंड: 15 फरवरी के बाद शुरू होगी झारखंड में SIR की प्रक्रिया, दूसरे राज्यों से आये लोगों की होगी पूरी पड़ताल, दिखाने होंगे दस्तावेज

Jharkhand: The SIR process will begin in Jharkhand after February 15th. People coming from other states will be thoroughly investigated and required to show documents.

रांची। झारखंड में जल्द ही SIR की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। चुनाव आयोग की तरफ से इसे लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है। मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने के उद्देश्य से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) फरवरी के दूसरे सप्ताह से शुरू होगी। प्रारंभिक तैयारियों पर मुहर लगने के बाद 16 फरवरी से इसकी औपचारिक शुरुआत हो सकती है। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से वंचित न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।

 

एसआईआर में उन मतदाताओं में विशेष चिंता देखी जा रही है, जिनका नाम वर्ष 2003 में या उससे पहले किसी अन्य राज्य की मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन बाद के वर्षों में वे झारखंड के स्थायी निवासी बनकर यहां के मतदाता बन गए। इसके अलावा अक्टूबर 2024 में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के बाद जिन युवाओं की उम्र अब 18 वर्ष पूरी हो चुकी है, उनके सामने भी मतदाता बनने की प्रक्रिया को लेकर सवाल हैं।

 

झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के. रवि कुमार के मुताबिक जिन नागरिकों का नाम 2003 या अन्य वर्षों में दूसरे राज्य की मतदाता सूची में दर्ज रहा है, उनका सत्यापन बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) द्वारा किया जाएगा। यह सत्यापन बीएलओ ऐप के माध्यम से फिजिकल वेरिफिकेशन पर आधारित होगा। संबंधित बीएलओ पुराने राज्य की मतदाता सूची से मिलान कर यह पुष्टि करेंगे कि संबंधित व्यक्ति अब झारखंड का वैध मतदाता है या नहीं।

 

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि पहली बार मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के इच्छुक युवा एक घोषणा पत्र के साथ अपने माता या पिता के दस्तावेज संलग्न कर फॉर्म-6 भर सकते हैं। यह फॉर्म संबंधित बीएलओ को जमा करना होगा। दस्तावेजों के आधार पर उनकी उम्र और निवास की पुष्टि की जाएगी, ताकि योग्य युवाओं को मताधिकार से वंचित न होना पड़े।

 

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर राज्य में “पैरेंटल मैपिंग” का कार्य लगभग अंतिम चरण में है। पैरेंटल मैपिंग के तहत मतदाताओं को उनके माता-पिता से जोड़ा जाता है, जिससे डुप्लीकेसी और फर्जी नामों की पहचान आसान हो सके। इसके पूरा होने के बाद विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह फिजिकल वेरिफिकेशन के आधार पर की जाएगी।

 

भारत निर्वाचन आयोग ने झारखंड में एसआईआर के लिए आधार वर्ष 2003 की मतदाता सूची को बनाया है। चूंकि उस समय राज्य गठन के शुरुआती वर्ष थे, इसलिए बड़ी संख्या में ऐसे नागरिक पाए जा सकते हैं जिनका नाम उस वक्त किसी अन्य राज्य की मतदाता सूची में दर्ज था। आयोग ने ऐसे मामलों की पहचान के लिए अपनी वेबसाइट पर पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित डिजिटल मतदाता सूचियों को सार्वजनिक किया है।

ashrita

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