कोर्ट में वकील की मौत: “वो मर रही थी और लोग VIDEO बना रहे थे” महिला वकील की मौत पर पति के गंभीर आरोप, कहा, किसी ने CPR भी नहीं दिया…
Lawyer dies in court: "She was dying and people were making videos." The lawyer's husband makes serious allegations about her death, saying no one even administered CPR.

Court News। कोर्ट में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक महिला वकील की हार्ट अटैक से मौत हो गयी। घटना के बाद महिला वकील के पति ने गंभीर आरोप लगाये हैं। पूरा मामला मुंबई की एस्प्लेनेड कोर्ट की है, जहां सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां वरिष्ठ वकील मालती पवार की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। 58 वर्षीय मालती पवार मुंबई की फैमिली कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करती थीं।
घटना के बाद अदालत परिसरों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की कमी को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मालती पवार सोमवार शाम एक केस की कॉपी लेने के लिए एस्प्लेनेड कोर्ट पहुंची थीं। इसी दौरान अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द महसूस हुआ। उन्होंने बार रूम में जाकर कुछ देर बैठकर आराम करने का प्रयास किया और अपने पति रमेश पवार को फोन कर तबीयत खराब होने की जानकारी दी। कुछ ही मिनटों बाद वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। मौके पर मौजूद वकील उन्हें कामा अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पति का आरोप: किसी ने CPR तक नहीं दिया, लोग वीडियो बनाते रहे
मालती पवार के पति रमेश पवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अदालत में किसी ने भी उनकी पत्नी को प्राथमिक उपचार देने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा—“अगर समय पर CPR दिया जाता या तुरंत पास के जीटी अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद मेरी पत्नी आज जिंदा होती। वहां लोगों ने मदद करने के बजाय मोबाइल निकालकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया।”
रमेश पवार ने बताया कि उन्हें शाम 6:30 बजे आजाद मैदान पुलिस स्टेशन से फोन आया कि उनकी पत्नी को कामा अस्पताल लाया गया है। जब वह वहां पहुंचे, तो उनका शव स्ट्रेचर पर पड़ा था और हैरान करने वाली बात यह थी कि कोई भी सहकर्मी वकील वहां मौजूद नहीं था।पुलिस ने मामले में आकस्मिक मृत्यु (ADR) दर्ज की है और आगे की जांच जारी है।
अदालतों में मेडिकल सुविधाओं की कमी उजागर
कई वकीलों ने अदालत परिसरों में मूलभूत आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की मांग उठाई है। वकील सुनील पांडे ने एस्प्लेनेड कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर कहा है कि रोज़ाना सैकड़ों वकील—जिनमें वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं—कोर्ट में उपस्थित रहते हैं, लेकिन न तो डॉक्टर मौजूद होते हैं और न ही फर्स्ट एड या CPR की सुविधा उपलब्ध है।उन्होंने मांग की है कि मुंबई की सभी अदालतों में तुरंत—
• फर्स्ट एड किट
• मेडिकल टीम
• CPR और आपातकालीन प्रशिक्षण
• एम्बुलेंस
• ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED)
जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
लगातार घटनाओं के बीच अब स्थायी मेडिकल सेटअप की मांग
पिछले कुछ वर्षों में अदालत परिसरों में अचानक तबीयत बिगड़ने पर समय पर सहायता न मिलने से मौत के कई मामले सामने आए हैं। इस घटना ने एक बार फिर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि इतनी भीड़ और संवेदनशील माहौल वाले कोर्ट परिसरों में अब तक मेडिकल इमरजेंसी सिस्टम क्यों विकसित नहीं किया गया।









