बालू माफियाओं की हिमाकत तो देखिये! पहले जवानों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, फिर स्कार्पियो से कुचल डाला, एक की चली गयी जान, एक गंभीर
Just look at the audacity of the sand mafia! First, they chased and beat the soldiers, then crushed them with a Scorpio; one died, one is seriously injured.

Police News : बालू माफियाओं को अब पुलिस से भी डर नहीं लगता। पुलिस ने कार्रवाई की, तो माफिया के गुर्गों ने जवान को ही गाड़ी से कुचल डाला। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है। कमाल की बात ये है कि पूरी घटना थाना से महज 800 मीटर की दूरी पर घटना। इस घटना ने एक बार फिर बिहार में बालू माफिया की शक्ति और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खनन विभाग और पुलिस बल पर हुए इस हमले ने सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
पटना के बिहटा में देर रात बालू माफिया का भयावह तांडव देखने को मिला। खनन विभाग की टीम पर बालू माफिया ने जानलेवा हमला किया, जिसमें सैफ के 57 वर्षीय जवान दुखहरण पासवान की मौके पर ही मौत हो गई और दूसरा जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हमला थाना से महज 800 मीटर की दूरी पर हुआ, जो सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
घटना के चश्मदीद माइंस इंस्पेक्टर उत्तम मनी के मुताबिक, सोमवार रात 12:30 बजे खनन विभाग की टीम सदवा गांव के पास गश्त कर रही थी। इसी दौरान उन्हें सोन नदी का बालू लदा एक ट्रैक्टर संदिग्ध स्थिति में दिखा। सैफ जवानों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन ड्राइवर ट्रैक्टर छोड़कर फरार हो गया।
इंस्पेक्टर के अनुसार, जैसे ही टीम ट्रैक्टर को जब्त कर थाने की ओर बढ़ रही थी, दुल्हिन बाजार मंदिर के पास अचानक एक सफेद स्कॉर्पियो ने उनका रास्ता रोक दिया। वाहन से 7 से 8 लोग उतरे और बिना किसी बातचीत के टीम पर लाठी-डंडों से हमला शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद सैफ जवानों ने परिस्थिति समझते हुए खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।
होमगार्ड जवान आशुतोष कुमार, जिसने घटना को अपनी आंखों से देखा, ने बताया कि जैसे ही वह ट्रैक्टर से उतरा, माफियाओं ने उस पर हमला कर दिया। बीच-बचाव में आए सैफ जवानों पर भी माफियाओं ने लाठी-डंडे बरसाए। जान बचाने के लिए भाग रहे जवानों में से दुखहरण पासवान को स्कॉर्पियो के ड्राइवर ने जानबूझकर कुचल दिया। आशुतोष ने बताया कि अपराधियों में शामिल कुछ चेहरों को वह पहचानता है और जरूरत पड़ने पर उनकी पहचान कर सकेगा।
घटना के बाद लोकल पुलिस मौके पर तो पहुंची, लेकिन तब तक हमलावर फरार हो चुके थे। थाने से इतनी कम दूरी होने के बावजूद गश्ती गाड़ी को पहुंचने में 10 से 15 मिनट का वक्त लग गया, जिसे लेकर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं।मृतक दुखहरण पासवान 3 बच्चों के पिता थे। उनके दोनों बेटे और बेटी सरकारी नौकरी में हैं।









