नहीं रहे मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता सलीम कुमार, कोच्चि के अस्पताल में ली अंतिम सांस
Veteran Malayalam cinema actor Salim Kumar is no more; he breathed his last in a Kochi hospital.

कोच्चि: मलयालम सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, दिग्गज अभिनेता, निर्देशक और निर्माता सलीम कुमार का निधन हो गया है। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें बीते दिन कोच्चि के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले ही उनका लिवर ट्रांसप्लांट भी हुआ था। सलीम कुमार के आकस्मिक निधन की खबर से पूरे मलयालम सिनेमा और उनके फैंस के बीच शोक की लहर दौड़ गई है।
घर ले जाया गया पार्थिव शरीर, आज हो सकता है अंतिम संस्कार
अस्पताल में अभिनेता के परिवार और करीबी दोस्तों की भारी भीड़ देखी गई। अस्पताल की प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर ले जाया गया है। संभावना जताई जा रही है कि आज ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, जिसमें सिनेमा जगत की कई बड़ी हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है।
तीन दशक का शानदार फिल्मी सफर
सलीम कुमार ने साल 1997 में अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने अपने करियर में 322 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। शुरुआत में अपनी बेहतरीन कॉमेडी के लिए पहचाने जाने वाले सलीम कुमार ने बाद में कई गंभीर भूमिकाएं निभाकर दर्शकों और समीक्षकों का दिल जीता।
राष्ट्रीय पुरस्कार: साल 2010 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
राज्य पुरस्कार: उनके बेहतरीन अभिनय के लिए केरल सरकार ने उन्हें 4 बार राज्य पुरस्कारों से भी नवाजा।
निर्देशन में भी आजमाया हाथ
अभिनय के अलावा सलीम कुमार को कहानियां पर्दे पर उतारने का भी बेहद शौक था। उन्होंने एक सफल अभिनेता बनने के बाद निर्देशन (Direction) के क्षेत्र में कदम रखा और तीन बेहतरीन फिल्में बनाईं:
कंपार्टमेंट (2015) – बतौर निर्देशक पहली फिल्म
कुरुथा जूखान
दैवमे कैथोज्हाम के. कुमारकणम (2018)
इसी साल रिलीज हुई थी आखिरी फिल्म
सलीम कुमार आखिरी बार इसी साल (2026) रिलीज हुई फिल्म ‘Koodothram’ में नजर आए थे। इससे पहले साल 2025 में भी उन्होंने ‘रेचल’ और ‘आजादी’ जैसी तीन फिल्मों में दमदार किरदार निभाए थे।
भले ही सलीम कुमार आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन मलयालम सिनेमा में उनका योगदान और उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।









