रांची- पुलिसकर्मी हो गये फेल : प्रमोशन ट्रेनिंग परीक्षा में 110 में 38 पुलिसकर्मी फेल, निशाने लगाने और लिखित परीक्षा में हो गये फेल, मच गयी खलबली…

Ranchi: Policemen fail: 38 out of 110 policemen fail in promotion training exam, fail in shooting and written test, causing commotion...

झारखंड पुलिस जवानों की ट्रेनिंग को लेकर एक बड़ी नाकामी सामने आयी है। जैप-10 परिसर में आयोजित पदोन्नति प्रशिक्षण के बाद हुए मूल्यांकन में 110 में से 38 पुलिसकर्मी फेल हो गये। चौकाने वाली बात ये है कि इनमें से 34 जवान फायरिंग टेस्ट में पूरी तरह विफल रहे।
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Jharkhand Police News : झारखंड पुलिस की निशानेबाजी बेहद कमजोर हो गयी है। उनके बंदूक से निकली गोलियां टारगेट पर नहीं लग रही है। जैप-10 (झारखंड आर्म्ड पुलिस) परिसर में पदोन्नति प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

लेकिन चौकाने वाली बात ये रही कि ट्रेनिंग के दौरान जो शूटिंग टेस्ट हुआ, उसमें कई पुलिसकर्मी फेल हो गये। पुलिस जवानों का प्रदर्शन कमजोर होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस महकमे के साथ-साथ राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गये हैं।

दरअसल जैप 10 में ये ट्रेनिंग प्रोग्राम साक्षर आरक्षी से सहायक अवर निरीक्षक (ASI) के पद पर प्रोन्नति के लिए आयोजित किया गया था। इसमें राज्य के विभिन्न जिलों से आए कुल 110 पुलिसकर्मियों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जब मूल्यांकन किया गया, तो इसके नतीजे चौंकाने वाले रहे। 110 में से केवल 72 जवान ही सफल घोषित किए गए, जबकि 38 पुलिसकर्मी प्रशिक्षण में असफल हो गए।

चिंता का विषय यह रहा कि असफल घोषित किए गए 38 जवानों में से 34 पुलिसकर्मी फायरिंग टेस्ट में पूरी तरह फेल हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, ये जवान अपने लक्ष्य पर एक भी सटीक निशाना लगाने में सफल नहीं हो सके।

यह स्थिति पुलिस जवानों की बुनियादी निशानेबाजी क्षमता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है, खासकर ऐसे राज्य में जहां नक्सलवाद और उग्रवाद जैसी चुनौतियां लंबे समय से बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि फायरिंग टेस्ट पुलिस प्रशिक्षण का एक मूल और अनिवार्य हिस्सा होता है। यदि पदोन्नति के लिए तैयार किए जा रहे जवान ही इस परीक्षा में असफल हो जाएं, तो यह न सिर्फ प्रशिक्षण व्यवस्था की कमजोरी दर्शाता है, बल्कि फील्ड में उनकी कार्यक्षमता को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करता है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कमजोर प्रदर्शन सिर्फ निशानेबाजी तक सीमित नहीं था। फेल हुए बाकी 20 पुलिसकर्मी लिखित विषयों में न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर सके। इनमें विभागीय नियमों, कानूनों और प्रक्रियाओं की समुचित जानकारी का अभाव पाया गया।

इसके अलावा, जंगल और कठिन इलाकों में दिशा पहचानने की क्षमता, युद्ध कौशल, क्षेत्र में मुकाबले की रणनीति, और आपातकालीन परिस्थितियों व उग्रवादी हमलों से निपटने की तैयारी में भी इन जवानों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा।

यह तथ्य और भी चिंताजनक है क्योंकि झारखंड जैसे राज्य में पुलिस को अक्सर घने जंगलों, दुर्गम इलाकों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चलाने पड़ते हैं। ऐसे में यदि पदोन्नति के स्तर पर ही जवान इन बुनियादी मानकों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं, तो यह भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय में भी मंथन शुरू हो गया है। प्रशिक्षण पद्धति, चयन प्रक्रिया और मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या मौजूदा प्रशिक्षण कार्यक्रम पर्याप्त हैं या फिर उनमें व्यापक सुधार की जरूरत है।

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