रिंकू सिंह अब विश्व कप नहीं खेलेंगे!: पिता की मौत की खबर सुन टीम छोड़ रिंकू सिंह वापस लौटे, अस्पताल में वेंटीलेटर पर रखा गया था….

Cricketer Rinku Singh News: भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह का टी 20 विश्व कप में खेलना अब असंभव है। रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह का निधन हो गया है। उन्होंने ग्रेटर नोएडा स्थित यथार्थ हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। वह स्टेज-4 लिवर कैंसर से पीड़ित थे और पिछले कुछ समय से उनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई थी। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनका देहांत हो गया।
टीम छोड़कर लौटे थे घर
अपने पिता की गंभीर स्थिति की सूचना मिलते ही रिंकू सिंह को टीम इंडिया का साथ छोड़कर तुरंत घर लौटना पड़ा था। टी-20 विश्व कप के दौरान चेन्नई के एम ए चिदंबरम स्टेडियम में आयोजित अभ्यास सत्र में वह शामिल नहीं हो पाए थे। बाद में स्पष्ट हुआ कि उनके पिता की हालत नाजुक थी, जिसके चलते उन्हें स्वदेश लौटना पड़ा। बताया गया कि वह जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से पहले अभ्यास सत्र में भी शामिल नहीं हुए थे। हालांकि, मैच से एक दिन पहले वह दोबारा टीम से जुड़ गए, लेकिन प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं बने।
जिम्बाब्वे के खिलाफ नहीं मिला मौका
जिम्बाब्वे के खिलाफ ‘करो या मरो’ मुकाबले में रिंकू की जगह संजू सैमसन को मौका दिया गया। भारत ने यह मैच 72 रन से जीत लिया। टीम इंडिया का सुपर-8 में अगला अहम मुकाबला 1 मार्च को है। ऐसे में रिंकू इस दुखद घड़ी में अपने परिवार के साथ समय बिता सकते हैं।
वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच पर संशय
भारत का अगला बड़ा मुकाबला वेस्टइंडीज के खिलाफ कोलकाता में होना है, जो सेमीफाइनल की दौड़ के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, रिंकू की उपलब्धता को लेकर फिलहाल टीम प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
संघर्षों से भरी रही कहानी
रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह अलीगढ़ में गैस सिलेंडर की डिलीवरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। रिंकू के क्रिकेटर बनने तक वह यही काम करते रहे। शुरुआती दिनों में वह रिंकू के क्रिकेट खेलने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन जब रिंकू को शानदार प्रदर्शन के लिए मोटरसाइकिल मिली और उन्होंने अपने खेल से पहचान बनानी शुरू की, तब पिता ने उनका समर्थन करना शुरू कर दिया।रिंकू की सफलता के पीछे उनके परिवार का संघर्ष और त्याग रहा है। पिता के निधन से परिवार और क्रिकेट जगत में शोक की लहर है।









