झारखंड में गैस सिलेंडर का गंभीर संकट, विधानसभा में वित्त मंत्री ने दी डराने वाली जानकारी, बताया, सिर्फ 20 प्रतिशत ही गैस की….
Jharkhand faces a serious gas cylinder crisis; the Finance Minister gave alarming information in the Assembly, stating that only 20 percent of the gas is available.

झारखंड में एलपीजी गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाने वाली खबर है। विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे राज्य में घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी में देरी हो रही है और हजारों रिफिल पेंडिंग हैं।
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रांची। झारखंड में भी गैंस सिलेंडर की कमी हो गयी है। एलपीजी गैस की आपूर्ति को लेकर विधानसभा में गंभीर चर्चा हुई, जहां संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य में गैस आपूर्ति की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका असर झारखंड के उपभोक्ताओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
बुकिंग अवधि बढ़ने से उपभोक्ता परेशान
मंत्री ने सदन में बताया कि राज्य में घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसके कारण गैस रिफिल बुकिंग की अवधि बढ़ा दी गई है। पहले शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ता 15 दिन के भीतर रिफिल बुकिंग कर सकते थे, लेकिन अब यह अवधि बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में रिफिल बुकिंग की अवधि 45 दिन कर दी गई है।उन्होंने कहा कि इस बदलाव से आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पहले गैस की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर थी।
डिलीवरी में हो रही देरी
मंत्री के अनुसार पहले गैस बुकिंग के 48 घंटे के भीतर सिलेंडर की डिलीवरी हो जाती थी, लेकिन अब इसमें तीन से चार दिन तक का समय लग रहा है। उन्होंने बताया कि 16 मार्च 2026 तक राज्य में तीनों प्रमुख तेल कंपनियों—Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum और Bharat Petroleum—की ओर से कुल 3,27,630 रिफिल लंबित हैं।
कमर्शियल गैस की आपूर्ति में भारी कटौती
राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि 13 मार्च को केंद्र सरकार के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जानकारी दी गई कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति में भारी कटौती की गई है। पहले जहां 80 प्रतिशत तक आपूर्ति की जा रही थी, उसे घटाकर मात्र 20 प्रतिशत कर दिया गया है।
14 मार्च को राज्य सरकार और तेल कंपनियों के साथ हुई बैठक में यह सामने आया कि झारखंड में हर महीने औसतन 2273.11 मीट्रिक टन कमर्शियल गैस की जरूरत होती है, लेकिन अब केवल 454.6 मीट्रिक टन गैस की आपूर्ति ही संभव हो पाएगी। इस स्थिति में राज्य को हर महीने करीब 1818.51 मीट्रिक टन गैस की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
उद्योग और होटल व्यवसाय पर असर
मंत्री ने कहा कि इस कमी का सबसे ज्यादा असर उद्योग और होटल व्यवसाय पर पड़ सकता है। जमशेदपुर और रांची जैसे औद्योगिक शहरों में कई बड़े उद्योग संचालित होते हैं। इन उद्योगों के कैंटीन में हजारों श्रमिकों के लिए भोजन बनाने की व्यवस्था गैस सिलेंडर पर ही निर्भर रहती है।
अगर गैस की आपूर्ति बाधित होती है तो इसका असर उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी संचालन में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।









