शिबू सोरेन को भारत रत्न : विधानसभा ने पारित किया प्रस्ताव, केंद्र को भेजी जायेगी शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की सिफारिश, बाबूलाल बोले, बिनोद बिहारी महतो और जयपाल सिंह मुंडा को…
Bharat Ratna for Shibu Soren: The assembly passed the resolution, the recommendation to give Bharat Ratna to Shibu Soren will be sent to the center, Babulal said, Binod Bihari Mahto and Jaipal Singh Munda should be given...

Shibu Soren Bharat Ratn : झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र का आज आखिरी दिन है। आज अंतिम दिन दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरू शिबू सोरेन को भारत रत्न देने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया। परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा द्वारा प्रस्तुत इस संकल्प को ध्वनिमत से मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव पर विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि केंद्र को प्रस्ताव भेजते समय जयपाल सिंह मुंडा और विनोद बिहारी महतो का नाम भी शामिल किया जाना चाहिए।
इससे पहले झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र 2025 के अंतिम दिन सदन में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सह-संस्थापक और दिवंगत आदिवासी नेता शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। यह प्रस्ताव परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा ने सदन में रखा, जिसे ध्वनिमत से स्वीकार कर लिया गया।
विधानसभा द्वारा पारित इस संकल्प को अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। दरअसल इससे पहले भी राज्य सरकार और विभिन्न राजनीतिक दल शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग कर चुके हैं, लेकिन पहली बार इसे विधानसभा से आधिकारिक रूप मिला है।
बाबूलाल मरांडी ने की ये मांग
इधर, प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि शिबू सोरेन निस्संदेह झारखंड आंदोलन के सबसे बड़े स्तंभ थे, लेकिन उनके साथ जयपाल सिंह मुंडा और विनोद बिहारी महतो का योगदान भी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्ताव में इन दोनों विभूतियों का नाम भी शामिल किया जाए ताकि उनके संघर्षों को उचित मान्यता मिल सके।
शिबू सोरेन का राजनीतिक सफर
4 अगस्त 2025 को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में 81 वर्षीय शिबू सोरेन का निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे सोरेन के निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। झारखंड में उन्हें ‘दिशोम गुरु’ यानी आदिवासियों का सर्वोच्च नेता माना जाता था। उनके निधन को एक राजनीतिक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
दिशोम गुरु कहलाए जाने वाले शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति के सबसे बड़े आदिवासी नेता माने जाते हैं। उन्होंने अलग राज्य की मांग को लेकर दशकों तक संघर्ष किया। उनकी अगुवाई में हुए आंदोलनों ने झारखंड अलग राज्य की नींव रखी।
सोरेन झामुमो के सह-संस्थापक थे और कई बार सांसद तथा मुख्यमंत्री रहे। उनका राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने हमेशा आदिवासी समाज और झारखंड की पहचान के लिए संघर्ष किया। उन्होंने आदिवासी आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया और झारखंड की पहचान को राजनीति में प्रमुख स्थान दिलाया।









