झारखंड: महिला के अंतिम संस्कार में जमकर हुआ विवाद, अर्थी के साथ परिजनों ने कर दिया सड़क जाम, उपायुक्त सहित दौड़ते भागते पहुंची पुलिस-प्रशासन की टीम
Jharkhand: A fierce dispute erupted at a woman's funeral; relatives blocked the road with the bier, and a police and administration team, including the Deputy Commissioner, rushed to the scene.

लोहरदगा। अंतिम संस्कार के दौरान उस वक्त बवाल मच गया, जब अर्थी का रास्ता रोक दिया गया। विवाद इतना बढ़ा कि सड़क जाम कर दिया गया। मामला झारखंड के लोहरदगा जिले का है। एक महिला के अंतिम संस्कार को लेकर खूब बवाल मच गया।
अंतिम यात्रा के दौरान रास्ता रोके जाने के विरोध में ग्रामीणों ने एनएच-143 एजी को सिठियो गांव के समीप करीब तीन घंटे तक जाम कर दिया। राष्ट्रीय राजमार्ग के जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
रास्ते को लेकर हुआ विवाद
दरअसल एक महिला के निधन के बाद समुदाय विशेष के लोग शव को अंतिम संस्कार के लिए सिठियो के पास कोयल नदी ले जा रहे थे। यह मार्ग वर्षों से अंतिम संस्कार के लिए उपयोग में लाया जा रहा था।
लेकिन रास्ते में दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई और कथित तौर पर अंतिम यात्रा को रोक दिया। उनका कहना था कि इस रास्ते से शव ले जाकर उनकी सीमा क्षेत्र में अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी जाएगी।इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस हो गई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई।
मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी
विवाद की सूचना पर पहले अंचल और थाना स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन आक्रोशित लोग मानने को तैयार नहीं हुए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बाद में लोहरदगा के उपायुक्त डॉ. ताराचंद और पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी खुद भी घटनास्थल पर पहुंचे।
वरिष्ठ अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत की और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। काफी देर तक चली बातचीत और समझाइश के बाद ग्रामीण शांत हुए। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद जाम हटाया गया और महिला के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सकी।
स्थायी समाधान की मांग पर अड़े ग्रामीण
हालांकि जाम हटने और अंतिम संस्कार संपन्न होने के बाद भी ग्रामीणों का आक्रोश पूरी तरह शांत नहीं हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि इस तरह की स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए रास्ते को लेकर स्थायी समाधान निकाला जाए। उनका कहना था कि हर बार अंतिम संस्कार या किसी धार्मिक प्रक्रिया के दौरान विवाद होना सामाजिक सौहार्द के लिए ठीक नहीं है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में फिर आंदोलन किया जा सकता है। इस पर प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि जल्द ही दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों, ग्राम पंचायत और प्रशासन की संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी और रास्ते से जुड़े विवाद का स्थायी और कानूनी समाधान निकाला जाएगा।









