झारखंड : पुलिस पर की थी फायरिंग, अब तीन नक्सलियों को कोर्ट ने सुनायी 10-10 साल की सजा, 42-42 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया

Jharkhand: Three Naxalites who had fired upon the police have been sentenced to 10 years in prison each by the court, and fined Rs. 42,000 each.

रांची। पुलिस पर फायरिंग के आरोपी नक्सलियों को कोर्ट ने 10-10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनायी है। तीन नक्सलियों को जेल के साथ-साथ 42-42 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला नामकुम थाना क्षेत्र में वर्ष 2022 में हुई मुठभेड़ से जुड़े मामले में आया है। पुलिस पर फायरिंग और लेवी वसूली के प्रयास के गंभीर आरोप नक्सलियों पर है।

अपर न्याययुक्त अखिलेश कुमार तिवारी की अदालत ने उग्रवादी सामुएल हासा, चंबरा मुंडा और बिरसा हंस उर्फ बिरसा मुंडा को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही तीनों सजाधारियों पर 42-42 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि दोषी निर्धारित जुर्माना राशि जमा नहीं करते हैं, तो उनकी सजा की अवधि और बढ़ा दी जाएगी।

कोर्ट ने इस मामले को राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर अपराध मानते हुए सख्त रुख अपनाया है।यह मामला नामकुम थाना क्षेत्र से जुड़ा है। घटना 10 जून 2022 की है, जब पुलिस को सूचना मिली थी कि एक निर्माणाधीन सड़क परियोजना में लगी कंपनी से माओवादी संगठन द्वारा लेवी की मांग की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, माओवादी संगठन के सदस्य कंपनी के कांट्रेक्टर को लेवी वसूली के उद्देश्य से जंगल में बुलाने की तैयारी कर रहे थे।

सूचना मिलते ही नामकुम थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इलाके में घेराबंदी की। जैसे ही पुलिस ने माओवादियों को चारों ओर से घेरा, माओवादी उग्रवादियों ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई गोलीबारी के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। पुलिस और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक माओवादी गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि अन्य दो को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया गया। घटनास्थल से पुलिस ने हथियार, कारतूस और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की थी।

घायल माओवादी को इलाज के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ नामकुम थाना में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

पुलिस ने जांच पूरी कर आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया, जिसके बाद मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत गवाहों, सबूतों और बरामद हथियारों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी पाया।

अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि पुलिस पर फायरिंग करना और विकास कार्यों में बाधा डालने के उद्देश्य से लेवी वसूली की कोशिश करना गंभीर अपराध है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

ऐसे मामलों में कठोर दंड देना आवश्यक है, ताकि समाज में कानून का डर बना रहे और उग्रवादी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।इस फैसले को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सजा उग्रवादी संगठनों के लिए एक कड़ा संदेश है कि हिंसा और अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ कानून सख्ती से कार्रवाई करेगा। तीनों आरोपी गिरफ्तारी के समय से ही जेल में बंद थे और अब अदालत के फैसले के बाद उन्हें लंबी सजा काटनी होगी।

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