झारखंड: “…क्यों ना चीफ सेकरेट्री पर अवमानना कार्यवाही शुरू की जाये?” जानिये क्यों हाईकोर्ट हुआ नाराज, चीफ सेकरेट्री व नगरीय विकास सचिव को होना पड़ा हाजिर
Jharkhand: "...Why not initiate contempt proceedings against the Chief Secretary?" Know why the High Court got angry, the Chief Secretary and Urban Development Secretary had to appear

रांची। झारखंड में नगर निकाय चुनाव टालने पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि उसके आदेश की लगातार अनदेखी की जा रही है, ऐसे में क्यों न राज्य की मुख्य सचिव पर अवमानना कार्यवाही शुरू की जाए। न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत में मंगलवार को इस मामले की सुनवाई हुई, जहां मुख्य सचिव अलका तिवारी और नगर विकास सचिव सशरीर उपस्थित हुए।
हाईकोर्ट में अब मामले की विस्तृत सुनवाई 10 सितंबर 2025 को होगी। दरअसल, पूर्व पार्षद रोशनी खलखो समेत अन्य की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई थी। इसमें कहा गया कि अदालत ने 4 जनवरी 2024 को तीन सप्ताह के भीतर निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया था, जिसे खंडपीठ ने भी बरकरार रखा था। इसके बावजूद सरकार ट्रिपल टेस्ट की आड़ में चुनाव टालती रही।
जनवरी 2025 की सुनवाई में भी अदालत ने चार माह के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया था और निर्वाचन आयोग को एक सप्ताह में संशोधित मतदाता सूची देने को कहा था। उस समय मुख्य सचिव अलका तिवारी ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव करा लिया जाएगा।
इस बीच 21 अगस्त 2025 को पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें बताया गया कि शहरी निकायों में सबसे ज्यादा मतदाता ओबीसी वर्ग से हैं। दूसरे स्थान पर सामान्य वर्ग, तीसरे पर एससी और चौथे स्थान पर एसटी मतदाता हैं।
फिर भी चुनाव प्रक्रिया शुरू न होने पर अदालत ने नाराजगी जताई और अगली सुनवाई तक मुख्य सचिव को स्पष्ट टाइमलाइन देने का निर्देश दिया। अदालत ने पहले भी टिप्पणी की थी कि “झारखंड में संवैधानिक तंत्र फेल हो गया है।”









