क्या झारखंड-बिहार में दिखेगा चंद्रगहण: देवघर में सूतक काल का क्यों नहीं पड़ेगा प्रभाव, होली पर चंद्रग्रहण के दुर्लभ संयोग का कैसा होगा असर

Will the lunar eclipse be visible in Jharkhand and Bihar? Why will the Sutak period not affect Deoghar? What will be the impact of the rare lunar eclipse on Holi?

वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण मंगलवार को लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना भारत में दिखाई देगी, हालांकि अधिकांश स्थानों पर इसका अंतिम चरण ही नजर आएगा। धार्मिक दृष्टि से सूतक काल प्रभावी रहेगा, जबकि वैज्ञानिक रूप से इसे नंगी आंखों से सुरक्षित देखा जा सकता है।
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नई दिल्ली। वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण मंगलवार को लगने जा रहा है। यह महत्वपूर्ण खगोलीय घटना भारत में दृश्य रहेगी, हालांकि देश के अधिकांश हिस्सों में इसका अंतिम चरण ही देखा जा सकेगा। खगोल विज्ञान के साथ-साथ धार्मिक दृष्टिकोण से भी इस ग्रहण को विशेष महत्व दिया जा रहा है। होली के समय चंद्रग्रहण लग रहा है। यह चंद्रग्रहण तीन मार्च मंगलवार की शाम 5:47 बजे से 6:48 बजे तक होगा।

बाबा मंदिर का पट शाम चार बजे ही बंद कर दिया जायेगा। ई-स्टेट पुरोहित के अनुसार बाबा के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान होने के कारण यहां सूतक काल का प्रभाव नहीं पड़ता।चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कराने और मंदिर की शुद्धि के पश्चात शाम करीब साढ़े सात बजे श्रृंगार पूजा के लिए कपाट दोबारा खोला जाएगा।इस दुर्लभ संयोग और विस्तारित उत्सव को लेकर बाबा नगरी में उत्साह का माहौल है। श्रद्धालु भी इस ऐतिहासिक होली के साक्षी बनने को काफी उत्सुक हैं, जहां आस्था, परंपरा और ज्योतिषीय संयोग का अनूठा संगम उन्हें देखने को मिलेगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे प्रारंभ होगा। यह 4:35 बजे अपने मध्य चरण, जिसे परमग्रास कहा जाता है, पर पहुंचेगा। इसके बाद ग्रहण का मोक्ष 6:47 बजे होगा। इस प्रकार ग्रहण की कुल अवधि लगभग तीन घंटे 27 मिनट रहेगी। भारत में चंद्रमा के क्षितिज से ऊपर आने का समय शाम के आसपास होने के कारण ग्रहण का अंतिम हिस्सा ही अधिकांश स्थानों पर दिखाई देगा।
खगोलविदों के अनुसार, शाम लगभग 6:20 बजे से 6:47 बजे के बीच ग्रहण का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। जैसे ही चंद्रमा क्षितिज से ऊपर आएगा, ग्रहण का शेष भाग दृष्टिगोचर होगा। मौसम साफ रहने की स्थिति में लोग इस खगोलीय घटना का अवलोकन कर सकेंगे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से लगभग नौ घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। सूर्य ग्रहण के मामले में यह अवधि 12 घंटे पूर्व से मानी जाती है। इस आधार पर तीन मार्च को प्रातः लगभग 6:20 बजे से सूतक प्रभावी रहेगा और ग्रहण के मोक्ष के साथ समाप्त होगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं और शुभ व मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। कई श्रद्धालु इस अवधि में उपवास रखते हैं और ग्रहण के दौरान मंत्र-जाप, ध्यान और ईश्वर स्मरण को विशेष फलदायी मानते हैं।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण का प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग-अलग पड़ता है, हालांकि इसका वैज्ञानिक आधार नहीं है। दूसरी ओर, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण एक सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है, जो तब घटित होती है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है। इसके लिए किसी विशेष चश्मे या उपकरण की आवश्यकता नहीं होती, जैसा कि सूर्य ग्रहण के दौरान जरूरी होता है। दूरबीन या टेलीस्कोप की सहायता से ग्रहण को और अधिक स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

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