झारखंड- बजट पर सुझाव देकर जीत सकते हैं ईनाम, मुख्यमंत्री ने “अबुआ दिशोम बजट पोर्टल एवं मोबाइल ऐप” का किया शुभारंभ

Jharkhand - Give suggestions on the budget and win prizes; the Chief Minister launched the "Abua Dishom Budget Portal and Mobile App".

रांची। झारखंड सरकार ने बजट बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। बजट में आम जनता के सुझावों को भी शामिल किया जायेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट सुझाव आमंत्रित करने हेतु “अबुआ दिशोम बजट पोर्टल एवं मोबाइल ऐप” का शुभारंभ किया। इसके माध्यम से राज्य के नागरिक सीधे अपने सुझाव सरकार तक पहुंचा सकेंगे। “अबुआ दिशोम बजट पोर्टल एवं मोबाइल ऐप” का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी मजबूत और समृद्ध राज्य की नींव केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जन-भागीदारी से रखी जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा बजट तैयार करना है, जो समाज के हर वर्ग की जरूरतों और आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार समावेशी विकास की दिशा में लगातार प्रयासरत है और इसी सोच के तहत बजट निर्माण की प्रक्रिया को आम लोगों के लिए खुला और सहभागी बनाया जा रहा है। “अबुआ दिशोम बजट पोर्टल” और मोबाइल ऐप के जरिए नागरिक अपने सुझाव सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे, जिससे नीतियों और योजनाओं को जमीनी हकीकत के अनुरूप बनाया जा सकेगा।

आम जनता 17 जनवरी 2026 तक इस पोर्टल, मोबाइल ऐप और विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों—जैसे व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स—के जरिए अपने सुझाव भेज सकती है। खास तौर पर राजस्व संवर्द्धन से जुड़े सुझावों को सरकार ने महत्वपूर्ण बताया है।

अधिकारियों का मानना है कि ऐसे सुझाव राज्य को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाने में मददगार साबित होंगे और विकास योजनाओं के लिए संसाधन जुटाने के नए रास्ते खोलेंगे।

इस पहल को और प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने यह भी घोषणा की है कि सर्वश्रेष्ठ तीन सुझाव देने वाले नागरिकों को सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान न केवल रचनात्मक सोच को बढ़ावा देगा, बल्कि आम लोगों को शासन प्रक्रिया से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बजट सुझाव प्राप्त करने की प्रक्रिया को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि राज्य के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों तक भी पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि 15 नवंबर से ही सुझाव लेने की प्रक्रिया को सक्रिय रूप से शुरू किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जन-भागीदारी से तैयार बजट न केवल अधिक व्यावहारिक होगा, बल्कि इससे शासन और जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में बेहतर नीतिगत फैसले लिए जा सकेंगे।

इस अवसर पर वित्त मंत्री, मुख्य सचिव, सचिव (व्यय), सचिव (संसाधन), विशेष सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विभागीय पदाधिकारी उपस्थित थे। सभी ने इस पहल को झारखंड के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए आम जनता से सक्रिय रूप से सुझाव देने की अपील की।

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