झारखंड में आंगनबाड़ी कर्मचारी की क्या नियमित होंगे? विधानसभा में पूछे सवाल के जवाब में मंत्री ने दिया ये जवाब… जानिये क्या है सरकार का रुख

Will Anganwadi workers be regularized in Jharkhand? The minister responded to a question in the Assembly... Learn about the government's stance.

रांची: झारखंड विधानसभा में आंगनबाड़ी कर्मचारियों और पर्यवेक्षिकाओं के नियमितीकरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। सदन में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्य सरकार ने महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। सरकार के जवाब ने न केवल वर्तमान व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट की, बल्कि भविष्य की नियुक्ति प्रक्रिया का भी संकेत दिया।

महिला बाल विकास विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, झारखंड राज्य की 52 बाल विकास परियोजनाओं में संविदा के आधार पर पूर्व से सृजित विभिन्न पदों का सरेंडर किया गया है।

इनमें महिला पर्यवेक्षिका के 286 पद, सांख्यिकी सहायक के 52 पद, लिपिक-सह-टंकक के 52 पद तथा आदेशपाल के 52 पद शामिल हैं। इस प्रकार कुल 442 संविदा पदों को समाप्त करने की कार्रवाई की गई है। विभाग ने बताया कि इन पदों के स्थान पर नियमित पदों के सृजन की अनुशंसा की गई है।

सरकार के उत्तर के अनुसार, महिला पर्यवेक्षिका (अराजपत्रित) के 286 पद, सांख्यिकी सहायक (अराजपत्रित) के 52 पद, लिपिक-सह-टंकक (अराजपत्रित) के 52 पद तथा आदेशपाल के 52 पदों के सृजन की सिफारिश की गई है। विभाग ने स्पष्ट किया कि यह कदम संविदा आधारित व्यवस्था को धीरे-धीरे नियमित ढांचे में परिवर्तित करने की दिशा में उठाया गया है।

सरकार ने सदन को यह भी अवगत कराया कि वर्तमान में संविदा पर नियुक्त एवं कार्यरत कर्मियों की संविदा अवधि जैसे-जैसे समाप्त होगी, वैसे-वैसे संविदा पद स्वतः समाप्त होते जाएंगे। इसके साथ ही नवनिर्मित नियमित पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस व्यवस्था के तहत नियमित नियुक्ति की कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी, जिससे प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनी रहे।

विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद आंगनबाड़ी कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे कर्मियों के लिए सरकार का यह जवाब महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया कब और किस समयसीमा में पूरी होगी, इस पर स्पष्टता आवश्यक है।

मानना है कि संविदा पदों को नियमित पदों में बदलने की पहल प्रशासनिक स्थिरता और सेवा सुरक्षा की दृष्टि से अहम कदम है। इससे न केवल कर्मचारियों को स्थायी रोजगार का अवसर मिलेगा, बल्कि विभागीय कार्यों में भी दक्षता और जवाबदेही बढ़ेगी।सरकार के इस उत्तर ने यह संकेत दिया है कि राज्य प्रशासन संविदा आधारित व्यवस्था से नियमित नियुक्ति प्रणाली की ओर बढ़ रहा है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नियमित पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया कब शुरू होती है और इसका लाभ कितने कर्मचारियों तक पहुंचता है। विधानसभा में उठे इस प्रश्न ने एक बार फिर आंगनबाड़ी कर्मचारियों के रोजगार और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों को केंद्र में ला दिया है।

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