TMC से इस्तीफा देते ही असम के सीएम से मिलने पहुंचीं सुष्मिता देव, क्या होने वाला है कोई बड़ा ‘खेला’?
Sushmita Dev met the Assam CM immediately after resigning from the TMC; is a major political maneuver in the offing?

नई दिल्ली:- तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राज्यसभा सदस्यता से अचानक इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता देव के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की अटकलें बेहद तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तब और गरमा गई जब सुष्मिता देव ने दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की। दोनों नेताओं की इस मुलाकात की एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसने असम और बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है।
एनडीए मुख्यमंत्रियों की बैठक के बीच हुई मुलाकात
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा इस समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मौजूद हैं, जहां वह एनडीए (NDA) मुख्यमंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने आए हुए हैं। सुष्मिता देव ने राज्यसभा से अपना इस्तीफा सौंपने के ठीक बाद मुख्यमंत्री सरमा से मुलाकात की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक का समय और सुष्मिता का हालिया इस्तीफा महज कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह उनके बीजेपी में शामिल होने का ठोस संकेत है।
सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर: कांग्रेस से टीएमसी और अब…?
सुष्मिता देव असम की राजनीति का एक बड़ा और जाना-माना चेहरा हैं:
- 2014: वह असम की सिलचर लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुनी गई थीं।
- महिला कांग्रेस अध्यक्ष: राजनीति में उनके बढ़ते कद को देखते हुए उन्हें अखिल भारतीय महिला कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया गया था।
- 2021 (TMC में एंट्री): कांग्रेस से अनबन के बाद उन्होंने साल
- 2021 में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था।
- राज्यसभा मनोनयन: टीएमसी में शामिल होने के महज एक महीने के भीतर ही ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा के लिए नॉमिनेट (मनोनीत) कर दिया था।
बंगाल चुनाव के बाद बिखर रही है टीएमसी!
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में अपेक्षित परिणाम न मिलने के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के भीतर बड़ी बगावत देखने को मिल रही है। पार्टी में असंतोष का आलम यह है कि:
विधायकों की बगावत: टीएमसी के 58 विधायक पहले ही बागी हो चुके हैं और उन्होंने ममता बनर्जी को चुनौती देते हुए विधानसभा में रितब्रता बनर्जी को अपना नेता प्रतिपक्ष चुन लिया है।
लोकसभा सांसदों का अलग गुट: टीएमसी के करीब 20 लोकसभा सांसदों का एक बड़ा गुट भी पार्टी से अलग राह पकड़ चुका है। हाल ही में इन सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर एक अहम बैठक की थी, जिसमें बंगाल के कद्दावर नेता और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे।
राज्यसभा में भी टीएमसी को बड़ा झटका
पार्टी के भीतर चल रही यह बगावत अब राज्यसभा तक पहुंच चुकी है। सुष्मिता देव से पहले टीएमसी के वरिष्ठ नेता शुखेंदु शेखर रॉय भी संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) से इस्तीफा दे चुके हैं।
संसदीय गणित: राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 13 सांसद थे। शुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद अब उच्च सदन में टीएमसी के सांसदों की संख्या घटकर केवल 11 रह गई है।
असम के सिलचर और बराक घाटी में सुष्मिता देव के मजबूत जनाधार को देखते हुए, अगर वह बीजेपी में शामिल होती हैं, तो यह पूर्वोत्तर में कांग्रेस और टीएमसी दोनों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें सुष्मिता देव के अगले आधिकारिक कदम पर टिकी हैं।









