वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर… पर खाली ब्लैकबोर्ड! सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत, क्या ‘शिक्षा मॉडल’ संभाल पाएगा 44 लाख बच्चों का भविष्य?
World-class infrastructure... yet empty blackboards! The ground reality of government schools—can the 'education model' secure the future of 4.4 million children?

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली का नाम शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में अक्सर सबसे ऊपर रखा जाता है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को देश भर में एक मॉडल के रूप में पेश किया जाता है। लेकिन इस चमकदार तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है, जो चिंताजनक है। एक तरफ जहां वर्ल्ड क्लास प्राइवेट स्कूलों की मिसाल दी जाती है, वहीं दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी किल्लत एक गंभीर संकट बनती जा रही है।
शिक्षकों की कमी से बिगड़ा छात्र-शिक्षक अनुपात
आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में लगभग 1,070 सरकारी स्कूल हैं, जिन्हें चलाने के लिए महज 34,000 नियमित शिक्षक ही तैनात हैं। यदि दिल्ली के कुल सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त 2,681 स्कूलों की बात करें, तो इनमें 44.9 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। UDISE+ 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी संस्थानों को मिलाकर कुल 1,61,958 शिक्षक कार्यरत हैं, जिससे कागजों पर छात्र-शिक्षक अनुपात 28:1 दिखता है।
लेकिन धरातल की सच्चाई अलग है। सरकारी आंकड़ों और विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली के सरकारी स्कूलों में करीब 30,000 से अधिक शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। इनमें से केवल डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन (DoE) के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में ही 10,000 से ज्यादा पद रिक्त हैं।
साइंस और मैथ्स की पढ़ाई पर सबसे बुरा असर
शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। स्कूलों में स्टाफ कम होने के कारण एक-एक शिक्षक को कई-कई क्लासें संभालनी पड़ रही हैं। शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक और अतिरिक्त काम का बोझ बढ़ने से स्कूलों का मेंटेनेंस और व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
इस पूरे संकट की सबसे बड़ी मार साइंस और मैथ जैसे कठिन और महत्वपूर्ण विषयों पर पड़ी है। कई स्कूलों में इन विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक ही मौजूद नहीं हैं। परिणामस्वरूप, बच्चों को विवश होकर कोचिंग और प्राइवेट ट्यूशन का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
भर्ती प्रक्रिया और समाधान की दिशा में कदम
शिक्षकों के खाली पदों को भरने और इस संकट से निपटने के लिए दिल्ली सरकार और दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) द्वारा प्रयास जारी हैं:
- TGT पदों पर नई भर्ती: कक्षा 6 से 10 तक के लिए 5,346 नए ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर्स (TGT) की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसमें गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषय शामिल हैं।
- गेस्ट टीचर्स को सेवा विस्तार: आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए गेस्ट टीचर्स को पुनर्नियुक्ति देने के संबंध में आवश्यक सर्कुलर जारी किए गए हैं।
- इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: बढ़ते नामांकन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सत्र 2026-27 तक लगभग 50 नए स्कूल भवनों और 8,000 अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक खाली पदों पर स्थायी और तेज गति से नियुक्तियां नहीं होंगी, तब तक दिल्ली के शिक्षा मॉडल का पूरा लाभ जमीनी स्तर पर विद्यार्थियों तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।









