SIR और तमिलनाडु चुनाव नतीजों के बीच कनेक्शन? 80 हजार से ज्यादा वोटर हटे वाली सभी 10 सीटें TVK के खाते में, आंकड़ों ने बढ़ाई सियासी हलचल
SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटने और TVK की जीत के बीच दिखा एक दिलचस्प पैटर्न, विपक्ष ने उठाए सवाल; विशेषज्ञों ने कहा, आंकड़े अकेले जीत का कारण साबित नहीं करते

नई दिल्ली। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। चुनाव परिणाम और विधानसभा क्षेत्रवार SIR डेटा के एक तुलनात्मक विश्लेषण में ऐसा पैटर्न सामने आया है, जिसमें अधिक संख्या में मतदाताओं के नाम हटने वाले कुछ क्षेत्रों में तमिलगा वेत्री कझगम यानी TVK का प्रदर्शन मजबूत रहा।
सबसे ज्यादा चर्चा उन 10 विधानसभा सीटों को लेकर है, जहां SIR प्रक्रिया के दौरान 80 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। उपलब्ध विश्लेषण के मुताबिक इन सभी 10 सीटों पर TVK उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। हालांकि, यह आंकड़ा अपने आप में यह साबित नहीं करता कि मतदाता सूची से नाम हटने की वजह से ही TVK को जीत मिली। चुनावी नतीजे पर SIR के प्रभाव को साबित करने के लिए यह देखना जरूरी होगा कि हटाए गए मतदाता वास्तव में कौन थे, वे पात्र मतदाता थे या नहीं और उनका राजनीतिक झुकाव क्या था।
80 हजार से ज्यादा नाम हटे, सभी 10 सीटों पर TVK की जीत
विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने पर TVK के प्रदर्शन में अंतर दिखाई देता है। जिन 19 सीटों पर 10 हजार तक नाम हटाए गए, वहां TVK ने 2 सीटें जीतीं। 10 हजार से 20 हजार नाम हटने वाली 80 सीटों में TVK को 22 सीटों पर जीत मिली।
वहीं 20 हजार से 30 हजार नाम हटने वाली 66 सीटों में TVK ने 32 सीटें जीतीं। 30 हजार से 50 हजार नाम हटाए जाने वाली 37 सीटों में पार्टी ने 24 सीटों पर जीत दर्ज की। 50 हजार से 80 हजार नाम हटने वाली 22 सीटों में TVK को 18 सीटों पर जीत मिली।
सबसे ज्यादा ध्यान 80 हजार से अधिक नाम हटने वाली 10 सीटों पर है, क्योंकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इन सभी 10 सीटों पर TVK उम्मीदवार विजयी रहे।
| SIR के दौरान हटाए गए नाम | कुल सीटें | TVK की जीत |
|---|---|---|
| 10,000 तक | 19 | 2 |
| 10,000 से 20,000 | 80 | 22 |
| 20,000 से 30,000 | 66 | 32 |
| 30,000 से 50,000 | 37 | 24 |
| 50,000 से 80,000 | 22 | 18 |
| 80,000 से अधिक | 10 | 10 |
तमिलनाडु चुनाव में TVK ने कुल 108 सीटें जीतीं और 234 सदस्यीय विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। चुनाव आयोग के विस्तृत परिणाम भी TVK की 108 सीटों की जीत की पुष्टि करते हैं।
क्या SIR से प्रभावित हुआ चुनाव परिणाम?
यही वह सवाल है जिसने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आंकड़ों में एक पैटर्न जरूर दिखाई देता है, लेकिन केवल दो आंकड़ों के बीच संबंध देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि SIR के दौरान नाम हटाए जाने से TVK को फायदा हुआ।
इसके लिए यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि हटाए गए मतदाताओं में कितने लोग वास्तव में पात्र मतदाता थे, कितने मतदाता दूसरे स्थान पर चले गए थे, कितने नाम डुप्लीकेट या अन्य कारणों से हटाए गए और हटाए गए लोगों का राजनीतिक समर्थन किस पार्टी के पक्ष में था।
यही वजह है कि विशेषज्ञों ने भी correlation यानी सांख्यिकीय संबंध और causation यानी किसी घटना को दूसरी घटना का सीधा कारण मानने के बीच अंतर करने की जरूरत बताई है।
DMK ने उठाए सवाल
SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। DMK की ओर से आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का असर पार्टी के पारंपरिक मतदाताओं पर पड़ा।
पार्टी नेताओं ने SIR के दौरान हुए deletions को चुनाव परिणाम से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन राजनीतिक दावों को साबित करने के लिए यह स्थापित करना जरूरी होगा कि हटाए गए नामों में वास्तव में किसी खास दल के समर्थकों का अनुपात असामान्य रूप से अधिक था।
TVK ने आरोपों को बताया संयोग
वहीं TVK की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है। पार्टी का तर्क है कि केवल इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि मतदाता सूची में बदलाव से उसे फायदा हुआ।
TVK की ओर से यह भी कहा गया है कि DMK और AIADMK के पारंपरिक मतदाताओं के एक हिस्से ने राजनीतिक विकल्प के तौर पर TVK का समर्थन किया हो सकता है। ऐसे में चुनाव परिणाम को केवल SIR deletions से जोड़ना उचित नहीं होगा।
विशेषज्ञों ने भी दी सावधानी बरतने की सलाह
SIR और चुनाव परिणामों के बीच संबंध पर चर्चा करते हुए राजनीतिक विश्लेषकों ने केवल आंकड़ों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से सावधान किया है। कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने भी कहा है कि मतदाताओं के नाम हटाना गलत था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इन deletions की वजह से TVK की जीत हुई या DMK की हार।
विश्लेषकों के मुताबिक असली सवाल यह होना चाहिए कि क्या किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाया गया। यदि ऐसा हुआ है तो वह चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। लेकिन यह साबित करने के लिए अलग स्तर के डेटा और जांच की जरूरत होगी कि इससे किसी खास पार्टी को चुनावी फायदा मिला।
अब आगे क्या होगा?
तमिलनाडु में SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच विधानसभा क्षेत्रवार डेटा ने बहस को एक नया आधार जरूर दिया है। 80 हजार से अधिक नाम हटने वाली सभी 10 सीटों पर TVK की जीत एक उल्लेखनीय सांख्यिकीय पैटर्न है, लेकिन इसे चुनाव परिणाम का प्रत्यक्ष कारण मानना अभी जल्दबाजी होगी।
आगे की बहस इस बात पर केंद्रित रहेगी कि SIR के दौरान कितने पात्र मतदाताओं के नाम हटे, उन deletions के कारण क्या थे और क्या हटाए गए मतदाताओं के राजनीतिक रुझान को लेकर कोई विश्वसनीय प्रमाण उपलब्ध है। इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही SIR और TVK की जीत के बीच संभावित संबंध को अधिक ठोस तरीके से समझा जा सकेगा।









