42 दिन धरना, 13 दिन भूख हड़ताल के बाद मुंबई में आदिवासी छात्रों का जनआक्रोश मार्च, मंत्री समेत अधिकारियों के इस्तीफे की मांग

नासिक से मुंबई तक सात दिन का लॉन्ग मार्च निकालने के बाद शिवाजी पार्क में जुटे आदिवासी युवा, छात्रावासों की बदहाल सुविधाओं, विद्यार्थियों की मौत की जांच और समय पर छात्रवृत्ति देने की मांग को लेकर आंदोलन तेज

 

मुंबई। महाराष्ट्र में आदिवासी विद्यार्थियों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आदिवासी छात्र संगठनों और युवाओं ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को मुंबई के शिवाजी पार्क में ‘आदिवासी GenZ जनआक्रोश मार्च’ आयोजित किया। आंदोलनकारी विद्यार्थियों का कहना है कि वे नासिक में 42 दिनों तक धरने पर बैठे रहे। इसके बाद 13 दिनों तक भूख हड़ताल की और नासिक से मुंबई तक सात दिन का लॉन्ग मार्च निकाला। छात्रों का आरोप है कि इतने लंबे आंदोलन के बावजूद उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

प्रदर्शन में मुख्य रूप से नासिक और नंदुरबार जैसे आदिवासी बहुल इलाकों से आए विद्यार्थियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। छात्रों ने अपनी मांगें पूरी करने के लिए राज्य सरकार को 25 अक्टूबर तक का समय दिया था। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद उन्होंने मुंबई में प्रदर्शन करने का फैसला किया।

मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे की मांग

आंदोलनकारी विद्यार्थियों की प्रमुख मांगों में महाराष्ट्र के आदिवासी विकास विभाग के मंत्री डॉ. अशोक उईके, विभाग के आयुक्त और सचिव के इस्तीफे की मांग भी शामिल है। छात्रों का कहना है कि आदिवासी विद्यार्थियों से जुड़ी समस्याओं को लंबे समय से उठाया जा रहा है, लेकिन उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हो पाया है।

प्रदर्शनकारी छात्र चाहते हैं कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा हो। हालांकि, संबंधित मंत्री और अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों तथा इस्तीफे की मांग पर उनका आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

छात्रावासों की सुविधाओं और विद्यार्थियों की मौत की जांच का मुद्दा

आदिवासी विद्यार्थियों की प्रमुख शिकायतें आवासीय स्कूलों और छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं की कमी से जुड़ी हैं। छात्रों का आरोप है कि इन संस्थानों में रहने वाले विद्यार्थियों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में कमियां हैं। आंदोलनकारी छात्र छात्रावासों में हुई विद्यार्थियों की मौत के मामलों की जांच कराने की मांग भी कर रहे हैं।

इसके साथ ही छात्रवृत्ति समय पर जारी करने की मांग को भी आंदोलन में प्रमुखता से उठाया जा रहा है। विद्यार्थियों का कहना है कि छात्रवृत्ति में देरी से उनकी पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो सकती हैं। वे चाहते हैं कि छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी बनाई जाए, ताकि पात्र विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता के लिए इंतजार न करना पड़े।

नासिक में लंबे आंदोलन के बाद मुंबई पहुंचे छात्र

आंदोलनकारी विद्यार्थियों के अनुसार, उन्होंने पहले नासिक में 42 दिनों तक धरना दिया था। इसके बाद अपनी मांगों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए 13 दिनों तक भूख हड़ताल की। इसके बावजूद समाधान नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए छात्रों ने नासिक से मुंबई तक सात दिन का लॉन्ग मार्च निकाला।

छात्रों का कहना है कि उन्होंने राज्य सरकार को अपनी समस्याओं से अवगत कराया और मांगों पर निर्णय लेने के लिए समय भी दिया। लेकिन तय समय सीमा तक ठोस फैसला नहीं होने के बाद उन्होंने मुंबई में जनआक्रोश मार्च निकालने का निर्णय लिया।

आजाद मैदान में प्रदर्शन की कोशिश के बाद बदली रणनीति

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विद्यार्थियों ने इससे पहले मुंबई के आजाद मैदान में प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। वहां अनुमति नहीं मिलने और पुलिस द्वारा कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद आंदोलनकारियों ने अपनी रणनीति बदली। इसके बाद रविवार सुबह 11 बजे दादर स्थित शिवाजी पार्क में जुटने का आह्वान किया गया।

प्रदर्शन के लिए पुलिस और प्रशासन से आधिकारिक अनुमति नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। इसके बावजूद छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने पर अड़े रहे। शिवाजी पार्क और दादर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किए जाने की जानकारी दी गई है।

सरकार के अगले कदम पर टिकी नजरें

आदिवासी विद्यार्थियों के इस आंदोलन के बाद अब राज्य सरकार और आदिवासी विकास विभाग की प्रतिक्रिया पर नजर है। छात्रावासों में बुनियादी सुविधाएं, विद्यार्थियों की मौत के मामलों की जांच और छात्रवृत्ति के समय पर भुगतान जैसे मुद्दे आंदोलन के केंद्र में हैं।

फिलहाल, आंदोलनकारियों की मांगों और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है। सरकार की ओर से मांगों पर कोई आधिकारिक निर्णय या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की आगे की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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