MP स्थापना दिवस पर PM मोदी का CM मोहन यादव को खास पत्र, सरकार के कामकाज की तारीफ; 2047 के विकसित भारत में बताई बड़ी भूमिका
प्रधानमंत्री ने राजा भोज, अहिल्याबाई होलकर, रानी दुर्गावती और टंट्या मामा की विरासत को किया याद, किसान कल्याण से लेकर मेट्रो, सिंचाई और रोजगार तक गिनाईं प्रदेश की उपलब्धियां; मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी जताया आभार

भोपाल। मध्यप्रदेश के 71वें स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार के कामकाज की सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में प्रदेश के किसानों, गरीबों, जनजातीय समुदायों, महिलाओं और युवाओं के लिए संचालित योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने भोपाल और इंदौर मेट्रो, केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क जैसी पहलों को भी रेखांकित किया। इसके जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनकी सरकार विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
‘मध्यप्रदेश की धरती प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध विरासत की कर्मभूमि’
प्रधानमंत्री मोदी ने पत्र की शुरुआत मध्यप्रदेश के 71वें स्थापना दिवस की शुभकामनाओं के साथ की। उन्होंने लिखा कि भारत के हृदय स्थल मध्यप्रदेश की धरती प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक चेतना, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मेहनती लोगों की कर्मभूमि है। स्थापना दिवस प्रदेश की उपलब्धियों को याद करने के साथ ‘विकसित मध्यप्रदेश से विकसित भारत’ के संकल्प को और मजबूत करने का अवसर भी है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि राज्य सरकार वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मना रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि ही गांवों की खुशहाली और देश की आर्थिक शक्ति का आधार है। किसानों को सम्मान देने के लिए राज्य सरकार की इस पहल को उन्होंने सराहनीय बताया।
मध्यप्रदेश से अपने पुराने जुड़ाव को भी किया याद
प्रधानमंत्री ने पत्र में मध्यप्रदेश के साथ अपने आत्मीय संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि संगठन के दिनों में उन्हें प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में जाने और कार्यकर्ताओं तथा आम नागरिकों के बीच समय बिताने का अवसर मिला।
उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे, अटल बिहारी वाजपेयी, राजमाता विजयाराजे सिंधिया, सुंदरलाल पटवा और कैलाश जोशी को याद करते हुए कहा कि इन नेताओं का समर्पण, विजन, जनसेवा, परिश्रम और सादगी आज भी देशसेवा की प्रेरणा देते हैं।
प्रधानमंत्री ने मध्यप्रदेश की अलग-अलग सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल, ग्वालियर-चंबल और विंध्य क्षेत्र की परंपराओं को प्रदेश की विशिष्ट पहचान बताया। उन्होंने उज्जैन की आध्यात्मिक विरासत, मां नर्मदा की पवित्र धारा, राजा भोज की विद्वत्ता, देवी अहिल्याबाई होलकर के सुशासन और रानी दुर्गावती तथा टंट्या मामा के शौर्य को प्रदेश की गौरवशाली विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
पत्र में मालवा की प्रसिद्ध कहावत ‘डग-डग रोटी, पग-पग नीर’ का भी उल्लेख किया गया। प्रधानमंत्री ने इसे प्रदेश की संपन्नता और यहां के लोगों की अतिथि-सत्कार की भावना का प्रतीक बताया।
भोपाल और इंदौर मेट्रो से लेकर गांवों की सड़कों तक का जिक्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ रहा है। ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र के अनुरूप प्रदेश में ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के साथ आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश में कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का उल्लेख किया। पत्र में भोपाल और इंदौर मेट्रो के नए कॉरिडोर, राजमार्गों के विस्तार और दूसरे राज्यों से बेहतर संपर्क व्यवस्था का जिक्र किया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कों और पुलों को भी महत्वपूर्ण बताया गया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इनसे गांवों को बाजार, स्कूल, अस्पताल और रोजगार के अवसरों से जोड़ने में मदद मिल रही है। इसका लाभ किसानों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और छोटे उद्यमियों को मिल रहा है।
केन-बेतवा परियोजना से 11 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचाई का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने बुंदेलखंड के लिए केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को नई संभावनाएं खोलने वाली योजना बताया। पत्र के मुताबिक, 44 हजार करोड़ रुपये से अधिक की इस परियोजना से मध्यप्रदेश के दस जिलों में करीब 11 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का लक्ष्य है। इसके अलावा लगभग 45 लाख लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
किसानों के खातों में 35 हजार करोड़ से अधिक की राशि पहुंचने का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने किसान कल्याण से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत मध्यप्रदेश के एक करोड़ से अधिक किसानों के खातों में 35 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि पहुंचाई गई है। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के माध्यम से भी 24 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का उल्लेख किया गया।
इसके अलावा सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना के तहत सात लाख से अधिक किसानों को 1,400 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि दिए जाने की बात कही गई। प्रधानमंत्री ने इन प्रयासों को किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
80 लाख से अधिक परिवारों तक नल से जल पहुंचाने का दावा
प्रधानमंत्री ने पत्र में जल जीवन मिशन और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में 80 लाख से अधिक परिवारों तक नल से स्वच्छ जल पहुंचाया गया है। बुरहानपुर और निवाड़ी जिलों में हुए कामों की उन्होंने विशेष सराहना की।
इसके साथ ही जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से जल संरचनाओं के संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया।
50 लाख से अधिक आवास और साढ़े चार करोड़ लोगों को आयुष्मान कवरेज
गरीबों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम जनमन के माध्यम से मध्यप्रदेश में 50 लाख से अधिक घरों का निर्माण किया गया है। उन्होंने आवास निर्माण के मामले में राज्य के प्रदर्शन की भी सराहना की।
स्वास्थ्य सुरक्षा के संबंध में उन्होंने बताया कि प्रदेश में साढ़े चार करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना के कवरेज से जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, इससे गरीब परिवारों को इलाज के खर्च की चिंता से राहत और स्वास्थ्य सुरक्षा का भरोसा मिला है।
जनजातीय समुदायों के विकास पर भी जोर
प्रधानमंत्री ने जनजातीय समाज के विकास को विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान यानी पीएम जनमन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से बैगा, भारिया और सहरिया जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुदायों की बस्तियों तक सड़क, आवास, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह अभियान पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के विचार को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
धार के पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क से रोजगार की उम्मीद
प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में प्रदेश में हो रही पहलों का भी जिक्र किया। उन्होंने धार जिले में बन रहे पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई है। इससे हजारों रोजगार के अवसर तैयार होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि विकास की इन पहलों से महिलाओं और बेटियों को भी आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। ये प्रयास मध्यप्रदेश के विकास को गति देने के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूत कर रहे हैं।
कूनो और गांधीसागर में चीतों की वापसी का जिक्र
पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर अभयारण्य में चीतों को फिर से बसाने की पहल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं।
पत्र में सांची के स्तूप, भीमबेटका के प्राचीन शैलचित्र, खजुराहो और ओरछा के मंदिर, ग्वालियर का ऐतिहासिक दुर्ग और मांडू की स्थापत्य कला को भी प्रदेश की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत बताया गया।
‘हर नागरिक को आगे बढ़ने का अवसर मिले’
प्रधानमंत्री ने पत्र के अंत में कहा कि मध्यप्रदेश की गौरवशाली विरासत को सहेजते हुए विकास की ऐसी यात्रा आगे बढ़ानी होगी, जिसमें हर परिवार सुखी और समृद्ध हो तथा प्रत्येक नागरिक को आगे बढ़ने का अवसर मिले।
उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और प्रदेशवासियों के परिश्रम से मध्यप्रदेश विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
CM मोहन यादव ने प्रधानमंत्री का जताया आभार
प्रधानमंत्री के पत्र के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी उन्हें धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की गौरवशाली विरासत, सांस्कृतिक परंपराओं, प्रदेशवासियों के परिश्रम और विकास यात्रा के प्रति प्रधानमंत्री का आत्मीय भाव सभी प्रदेशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
मुख्यमंत्री ने कुशाभाऊ ठाकरे, अटल बिहारी वाजपेयी और प्रदेश की अन्य महान विभूतियों के योगदान को याद करने के लिए भी प्रधानमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।
मोहन यादव ने गरीब कल्याण, किसान समृद्धि, सिंचाई, बुनियादी ढांचे, जनजातीय उत्थान, महिला सशक्तिकरण और युवाओं के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसरों के विस्तार को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरूप विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है।









