आस्था और प्रेम का अनोखा नजारा…जेल की चारदीवारी में भी कायम रहा करवा चौथ का विश्वास….20 महिला बंदियों ने रखा निर्जला व्रत…चांद देखकर खोला उपवास…

 

रायबरेली। करवा चौथ का त्योहार पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना से जुड़ा होता है। इस दिन महिलाएं अपने पतियों की सलामती के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चांद देखने के बाद ही उपवास खोलती हैं। रायबरेली जिला कारागार में भी इस परंपरा की झलक देखने को मिली, जहां जेल की चारदीवारी के भीतर रह रहीं 20 महिला बंदियों ने अपने पतियों की लंबी उम्र की कामना के साथ करवा चौथ का व्रत रखा। घर-परिवार से दूर होने के बावजूद इन महिलाओं की आस्था और अपने जीवनसाथी के प्रति प्रेम में कोई कमी नहीं दिखी।

करवा चौथ के मौके पर सुबह से ही महिला बैरकों में पर्व की तैयारियां शुरू हो गई थीं। व्रत रखने वाली बंदियों को पूजा-अर्चना करने में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए जेल प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए। महिलाओं को पूजन सामग्री और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। बैरकों में साफ-सफाई का ध्यान रखा गया और जेल कर्मचारियों ने भी पूरे दिन उनका सहयोग किया, ताकि सभी महिलाएं शांतिपूर्वक पूजा कर सकें।

जेल अधीक्षक प्रभात सिंह ने बताया कि महिला बंदियों के लिए पर्व को देखते हुए विशेष व्यवस्था की गई थी। जिन महिलाओं के पति भी जेल में बंद हैं, उनकी मुलाकात कराने का इंतजाम किया गया। वहीं, जिनके पति जेल से बाहर रह रहे हैं, उनके लिए भी मिलने का विशेष समय तय किया गया, जिससे महिलाएं करवा चौथ के दिन अपने जीवनसाथी से मिल सकें।

शाम को चांद निकलने के बाद महिला बंदियों ने पूजा-अर्चना की और चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना निर्जला व्रत खोला। इस दौरान पतियों से मुलाकात कई महिलाओं के लिए भावुक पल बन गई। लंबे समय से परिवार से दूर रह रहीं कुछ बंदियों की आंखें अपने पतियों से मिलकर नम हो गईं। किसी ने कुछ पल साथ बिताए, तो किसी ने परिवार का हाल जाना।

आमतौर पर करवा चौथ पर महिलाएं घर की छत या आंगन में चांद देखकर अपने पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलती हैं, लेकिन जिला कारागार में परिस्थितियां अलग थीं। इसके बावजूद महिलाओं ने अपनी परंपरा और आस्था को पूरी श्रद्धा के साथ निभाया। जेल की चारदीवारी उनके लिए घर से दूरी जरूर बनी रही, लेकिन अपनों के प्रति प्रेम और विश्वास कम नहीं हुआ।

करवा चौथ के दिन महिला बैरकों का माहौल भी आम दिनों से अलग नजर आया। जेल प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं ने बंदियों को त्योहार के मौके पर अपने परिवार से जुड़ने का अवसर दिया। यह पर्व उनके लिए केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अपनों की याद, मुलाकात और उम्मीद से भरा एक भावुक दिन भी बन गया।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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