AIIMS Deoghar Convocation: “डॉक्टर बनना सिर्फ डिग्री लेना नहीं, जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी है”, उप राष्ट्रपति का छात्रों को बड़ा संदेश; AI और तकनीक पर भी कही अहम बात

एम्स देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में सीपी राधाकृष्णन ने सेवा, संवेदनशीलता और ईमानदारी को चिकित्सा पेशे की असली पहचान बताया। कहा, AI कितना भी आगे बढ़ जाए, मरीजों के इलाज में मानवीय स्पर्श की जगह नहीं ले सकता।

देवघर। डॉक्टर बनने का सपना पूरा करना केवल एक डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति बड़ी जिम्मेदारी स्वीकार करना भी है। मरीजों की जिंदगी कई बार डॉक्टर के समय पर लिए गए फैसले और उपचार पर निर्भर करती है। इसलिए चिकित्सा पेशे में ज्ञान और तकनीकी दक्षता के साथ संवेदनशीलता, ईमानदारी और सेवा भाव भी उतना ही जरूरी है। यह संदेश उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को एम्स देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में चिकित्सा विद्यार्थियों को दिया।

उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों के लिए डॉक्टर सबसे बड़े भरोसे का प्रतीक होते हैं। ऐसे में चिकित्सकों को अपनी जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा और दया भाव के साथ निभानी चाहिए। उनका संबोधन चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, आधुनिक तकनीक और मानवीय मूल्यों पर केंद्रित रहा।

विकसित भारत-2047 का सपना, स्वास्थ्य व्यवस्था की भूमिका अहम

उप राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। स्वस्थ नागरिक देश की प्रगति में योगदान दे सकते हैं, इसलिए चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार राष्ट्रीय विकास से सीधे जुड़ा है।

उन्होंने एम्स जैसे संस्थानों को विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में अहम बताया। ऐसे संस्थान न केवल लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराते हैं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने में भी योगदान देते हैं।

देवघर में ही मिलने लगीं बेहतर चिकित्सा सुविधाएं

सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना बेहद जरूरी है। देवघर एम्स जैसे संस्थान इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पहले बेहतर और उन्नत उपचार के लिए कई मरीजों को दिल्ली जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब देवघर में भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में नए एम्स स्थापित होने से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद मिली है। इससे मरीजों को अपने क्षेत्र के नजदीक बेहतर इलाज मिलने की संभावना बढ़ती है। ऐसे संस्थान संबंधित क्षेत्रों के विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं के संतुलित विस्तार में भी योगदान देते हैं।

मेडिकल कॉलेज 380 से बढ़कर 846, MBBS और PG सीटों में भी वृद्धि

उप राष्ट्रपति ने देश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए मेडिकल कॉलेजों और मेडिकल सीटों की संख्या में हुई वृद्धि को महत्वपूर्ण बताया। उनके संबोधन के अनुसार, एमबीबीएस की पढ़ाई कराने वाले मेडिकल कॉलेजों की संख्या पहले 380 थी, जो बढ़कर 846 हो गई है।

उन्होंने बताया कि एमबीबीएस की सीटें भी पहले लगभग 51 हजार थीं, जो अब बढ़कर 1.39 लाख हो गई हैं। वहीं, स्नातकोत्तर यानी पीजी मेडिकल सीटों की संख्या 31 हजार से बढ़कर 86 हजार हो गई है। इन आंकड़ों के जरिए उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के बढ़ते अवसरों और देश में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयासों को रेखांकित किया।

मेडिकल क्षेत्र में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी उत्साहजनक

चिकित्सा शिक्षा में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी पर खुशी जाहिर करते हुए उप राष्ट्रपति ने इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में सकारात्मक बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि मेडिकल क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति समाज में आगे बढ़ने के अवसरों का संकेत है।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपने पेशे की गरिमा बनाए रखने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का संदेश दिया। चिकित्सा क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा में उनकी भूमिका भी मजबूत होती है।

AI कितना भी आगे बढ़ जाए, मरीज को चाहिए मानवीय संवेदना

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और आधुनिक तकनीक के बढ़ते उपयोग पर बोलते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकती है, लेकिन वह मानवीय स्पर्श और संवेदनशीलता की जगह नहीं ले सकती।

उन्होंने चिकित्सा विद्यार्थियों से अपील की कि वे मरीजों के साथ सहानुभूति रखें और उनके दर्द तथा परेशानियों को समझने का प्रयास करें। उनके संदेश का सार यह था कि सफल डॉक्टर बनने के लिए केवल बीमारी की पहचान करना और उपचार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीज के साथ भरोसे और संवेदना का रिश्ता बनाना भी जरूरी है।

बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू और तिलका मांझी को किया याद

अपने संबोधन में उप राष्ट्रपति ने झारखंड के महान स्वतंत्रता सेनानियों भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू और तिलका मांझी के संघर्ष और बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों का जीवन साहस, स्वाभिमान और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा देता है।

उन्होंने नई पीढ़ी से उनके योगदान से सीख लेने का आह्वान किया। झारखंड की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को अपने पेशे के साथ-साथ समाज और देश के प्रति अपने दायित्वों को भी याद रखने का संदेश दिया।

इलाज के साथ रिसर्च में भी अहम भूमिका निभा रहा एम्स देवघर

उप राष्ट्रपति ने कहा कि एम्स देवघर की भूमिका केवल मरीजों के उपचार तक सीमित नहीं है। यह संस्थान चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दे रहा है। आने वाले समय में एम्स देवघर झारखंड के साथ-साथ पूर्वी भारत के लिए भी एक महत्वपूर्ण चिकित्सा और शोध केंद्र के रूप में उभर सकता है।

उन्होंने नर्सिंग और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों की भूमिका पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, ये स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। मरीजों की देखभाल से लेकर उपचार की प्रक्रिया तक उनकी जिम्मेदारी बेहद अहम होती है। बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए डॉक्टरों के साथ नर्सिंग और पैरामेडिकल कर्मियों का योगदान भी जरूरी है।

विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने और शिक्षकों का सम्मान करने की अपील

बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर आने को अपना सौभाग्य बताते हुए सीपी राधाकृष्णन ने विद्यार्थियों से अपने शिक्षकों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करने की अपील की। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित लोगों से तालियां बजाकर उनके योगदान का सम्मान करने को कहा।

उप राष्ट्रपति ने सभी से नशे से दूर रहने का संकल्प लेने का भी आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि शिक्षा और पेशेवर सफलता के साथ स्वस्थ जीवनशैली, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हैं।

दीक्षांत समारोह में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

एम्स देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे, राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा और देवघर के विधायक सुरेश पासवान उपस्थित रहे।

समारोह में एम्स देवघर की अध्यक्ष एमवी पद्मा श्रीवास्तव तथा संस्थान के निदेशक-सह-सीईओ प्रो. डॉ. नितिन एम. गंगने सहित अन्य गणमान्य लोग भी शामिल हुए। समारोह के दौरान चिकित्सा विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उप राष्ट्रपति ने स्पष्ट संदेश दिया कि डॉक्टर की असली पहचान केवल उसकी डिग्री या विशेषज्ञता से नहीं, बल्कि मरीजों के प्रति उसकी संवेदनशीलता, सेवा भावना और जिम्मेदारी से भी होती है।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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