Beautiful Train Routes India: पहाड़, बादल, चाय के बागान, झरने और सुरंगें… इन रेलवे रूट पर मंजिल से ज्यादा खूबसूरत है सफर, ट्रैवल लिस्ट में जरूर करें शामिल
भारत के ये 3 ट्रेन रूट हैं इतने खूबसूरत, सफर खत्म होने पर भी नहीं भूल पाएंगे रास्ते के नजारे

नई दिल्ली। भारत में ट्रेन का सफर सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने का साधन नहीं है। देश में कुछ ऐसे रेलवे रूट हैं, जहां ट्रेन की खिड़की से बाहर दिखाई देने वाले नजारे पूरे सफर को एक यादगार अनुभव में बदल देते हैं। कहीं ट्रेन ऊंचे पहाड़ों के बीच से गुजरती है, कहीं बादलों से ढकी घाटियां और चाय के बागान दिखाई देते हैं तो कहीं पश्चिमी घाट के जंगल, झरने और नदियां यात्रियों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं।
अगर आप भी ऐसी ट्रेन यात्रा करना चाहते हैं, जिसमें मंजिल से ज्यादा रास्ता खूबसूरत लगे, तो भारत के ये तीन रेलवे रूट आपकी ट्रैवल लिस्ट में शामिल किए जा सकते हैं। कालका-शिमला रेलवे, नीलगिरि माउंटेन रेलवे और कोंकण रेलवे, तीनों की अपनी अलग खासियत है।
कालका-शिमला रेलवे: पहाड़ों, सुरंगों और घाटियों के बीच सफर
हिमाचल प्रदेश का कालका-शिमला रेलवे देश के सबसे आकर्षक पहाड़ी रेल मार्गों में शामिल है। कालका से शिमला की ओर बढ़ते हुए ट्रेन धीरे-धीरे पहाड़ों की ऊंचाई पर पहुंचती है। रास्ते में देवदार और चीड़ के जंगल, पहाड़ी बस्तियां, गहरी घाटियां और घुमावदार पहाड़ी रास्ते दिखाई देते हैं।
करीब 96 किलोमीटर लंबा यह नैरो गेज रेल मार्ग UNESCO की Mountain Railways of India विश्व धरोहर का हिस्सा है। यह मार्ग पहाड़ी इलाके में रेलवे इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण भी माना जाता है। ट्रेन अपने रास्ते में बड़ी संख्या में सुरंगों, पुलों और घुमावदार मोड़ों से गुजरती है।
इस सफर की खासियत ट्रेन की धीमी रफ्तार भी है, जिसकी वजह से यात्री आराम से पहाड़ी नजारों का आनंद ले सकते हैं। बरसात के बाद आसपास की पहाड़ियों पर हरियाली और ज्यादा घनी नजर आती है, जबकि सर्दियों में कई जगह बर्फ से ढकी चोटियां दिखाई दे सकती हैं।
इस रूट पर बड़ोग और उसके आसपास का इलाका भी यात्रियों को खासा आकर्षित करता है। जैसे-जैसे ट्रेन शिमला की ओर बढ़ती है, ऊंचाई के साथ मौसम और प्राकृतिक दृश्य भी बदलते हुए महसूस होते हैं।
नीलगिरि माउंटेन रेलवे: चाय के बागानों और बादलों के बीच दौड़ती ट्रेन
दक्षिण भारत में खूबसूरत ट्रेन यात्राओं की बात हो तो तमिलनाडु का नीलगिरि माउंटेन रेलवे खास जगह रखता है। मेट्टुपालयम से ऊटी की ओर जाने वाली यह ऐतिहासिक रेल लाइन नीलगिरि की पहाड़ियों और हरियाली के बीच से गुजरती है।
करीब 46 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर ट्रेन निचले इलाके से शुरू होकर ऊंचाई की ओर बढ़ती है और लगभग 2,203 मीटर तक पहुंचती है। नीलगिरि माउंटेन रेलवे भी UNESCO की Mountain Railways of India विश्व धरोहर का हिस्सा है।
इस सफर के दौरान यात्रियों को घने जंगल, पहाड़ी झरने, चाय के बागान और बादलों से घिरी घाटियां देखने को मिलती हैं। खासकर कुन्नूर के आसपास का इलाका अपने चाय बागानों और पहाड़ी दृश्यों के लिए जाना जाता है।
इस रेलवे लाइन की इंजीनियरिंग भी इसे खास बनाती है। पहाड़ की तीखी चढ़ाई पार करने के लिए यहां रैक एंड पिनियन प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि यह सामान्य रेल मार्गों से अलग नजर आता है।
बारिश के बाद नीलगिरि की हरियाली और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई देती है। ऊटी जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन यात्रा सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि छुट्टियों का एक खास अनुभव बन सकती है।
कोंकण रेलवे: जहां एक तरफ पहाड़ तो दूसरी तरफ समुद्र का एहसास
पश्चिमी घाट और भारत के पश्चिमी तट से गुजरने वाला कोंकण रेलवे अपने अलग तरह के प्राकृतिक दृश्यों के लिए मशहूर है। महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक के तटीय इलाकों से गुजरते हुए यह रेल मार्ग यात्रियों को पहाड़, जंगल, नदियां, घाटियां और समुद्र के करीब के दृश्य दिखाता है।
कोंकण रेलवे नेटवर्क में दर्जनों सुरंगें और 1,800 से ज्यादा बड़े-छोटे पुल हैं। कर्नाटक के होन्नावर में शरावती नदी पर बना करीब 2.06 किलोमीटर लंबा पुल इस नेटवर्क की प्रमुख संरचनाओं में शामिल है। वहीं रत्नागिरी क्षेत्र में पनवल नदी का ऊंचा वायाडक्ट भी इस रूट की इंजीनियरिंग का खास उदाहरण है।
मानसून के दौरान कोंकण क्षेत्र की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। पहाड़ों से गिरते झरने, बादलों से ढके पश्चिमी घाट, घने जंगल और नदियों को पार करती ट्रेन का दृश्य यात्रियों को लंबे समय तक याद रह सकता है।
गोवा और रत्नागिरी के आसपास ट्रेन की खिड़की से नारियल के पेड़, लाल मिट्टी वाले गांव और दूर तक फैली हरियाली दिखाई देती है। कई जगह एक सुरंग से निकलते ही सामने घाटी, नदी या हरे-भरे पहाड़ों का नजारा दिखाई देता है।
हालांकि मानसून के दौरान कोंकण क्षेत्र में भारी बारिश के कारण कभी-कभी ट्रेन संचालन प्रभावित हो सकता है। इसलिए इस मौसम में यात्रा की योजना बनाने से पहले ट्रेन की ताजा स्थिति और रेलवे की अपडेट जरूर जांच लेना चाहिए।
तीनों रूट की अपनी अलग कहानी
कालका-शिमला रेलवे आपको हिमालयी पहाड़ों और सुरंगों के बीच ले जाता है, नीलगिरि माउंटेन रेलवे चाय के बागानों और बादलों से घिरी पहाड़ियों का अनुभव कराता है, जबकि कोंकण रेलवे पश्चिमी घाट, नदियों, जंगलों और तटीय इलाकों की खूबसूरती दिखाता है।
यही वजह है कि इन रूटों पर ट्रेन से सफर करना सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि अपने आप में एक पर्यटन अनुभव बन जाता है। अगर आप ऐसी छुट्टी की तलाश में हैं जहां रास्ते के हर मोड़ पर नया नजारा आपका इंतजार करे, तो इन तीनों ट्रेन रूट को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर जगह दे सकते हैं।









