चार महीने बाद झारखंड में बालू खनन पर लगी रोक हटी, लेकिन राहत सिर्फ 14 घाटों तक! 444 घाट चिह्नित, बाकी पर अभी इंतजार

खान एवं भूतत्व विभाग ने निर्धारित नियमों के तहत अगले आठ महीने तक वैध बालू घाटों से उठाव की अनुमति दी है। राज्य में 444 बालू घाट चिह्नित हैं, लेकिन फिलहाल केवल 14 घाटों की लीज प्रक्रिया पूरी होने के कारण इन्हीं से बालू उठाव किया जा सकेगा।

रांची। झारखंड में करीब चार महीने से बालू खनन और उठाव पर लगी रोक हटने के बाद निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। खान एवं भूतत्व विभाग के आदेश के बाद अब राज्य के वैध बालू घाटों से निर्धारित नियमों के तहत बालू का उठाव किया जा सकेगा। हालांकि, रोक हटने का मतलब यह नहीं है कि राज्य के सभी बालू घाटों से खनन शुरू हो गया है। फिलहाल अनुमति केवल उन्हीं घाटों के लिए प्रभावी होगी, जहां लीज से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

राज्य में कुल 444 बालू घाट चिह्नित किए गए हैं, लेकिन इनमें से अभी सिर्फ 14 घाटों की लीज पूरी हुई है। ऐसे में बालू उठाव की अनुमति फिलहाल इन्हीं 14 घाटों तक सीमित रहेगी। बाकी घाटों पर खनन शुरू करने के लिए संबंधित प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी है। विभागीय अनुमति मिलने के बाद ही वहां से बालू उठाव किया जा सकेगा।

444 घाट चिह्नित, लेकिन फिलहाल 14 से ही उठेगी बालू

झारखंड में बालू की उपलब्धता और वैध खनन व्यवस्था को लेकर खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्यभर में 444 बालू घाट चिह्नित किए हैं। इसके बावजूद सभी घाटों पर खनन शुरू करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। वर्तमान में केवल 14 घाटों की लीज पूरी होने के कारण इन्हीं घाटों से नियमानुसार बालू उठाव किया जा सकेगा।

अन्य घाटों पर लीज और जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही खनन की अनुमति मिल सकेगी। इससे साफ है कि रोक हटने के बावजूद बालू की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। बालू कारोबारियों, निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों और आम उपभोक्ताओं की नजर अब इस बात पर रहेगी कि शेष घाटों की प्रक्रिया कब तक पूरी होती है।

बारिश के चार महीने बालू जमा होने के लिहाज से अहम

बालू खनन पर रोक की समय-सीमा तय करने में पर्यावरणीय पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आकलन के अनुसार, झारखंड में करीब चार महीने तक बारिश होती है। खनन विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश के दौरान नदियों के बहाव के साथ बालू बहकर अलग-अलग स्थानों पर जमा होता है। इस प्राकृतिक प्रक्रिया का नदी के पर्यावरण और बालू की उपलब्धता से संबंध है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बारिश के मौसम में कुछ सूक्ष्मजीवों और कीटों की गतिविधियां बढ़ती हैं। ऐसे में नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखते हुए बालू खनन की समय-सीमा और नियम निर्धारित किए जाते हैं। हालांकि, अलग-अलग घाटों पर खनन की अनुमति संबंधित पर्यावरणीय शर्तों और लागू नियमों के पालन पर निर्भर करेगी।

अगले आठ महीने नियमों के तहत हो सकेगा बालू उठाव

विभागीय आदेश के अनुसार, रोक हटने के बाद निर्धारित नियमों के तहत अगले आठ महीने तक वैध बालू घाटों से बालू उठाव किया जा सकेगा। लेकिन इसके लिए लीज और अन्य जरूरी शर्तों का पालन अनिवार्य होगा। बिना अनुमति या नियमों के विरुद्ध बालू खनन को वैध नहीं माना जाएगा।

फिलहाल झारखंड में बालू खनन पर लगी रोक हटने से राहत जरूर मिली है, लेकिन 444 चिह्नित घाटों में से केवल 14 पर ही लीज पूरी होने के कारण व्यवस्था सीमित बनी हुई है। अब यह देखना होगा कि बाकी घाटों की औपचारिकताएं कितनी जल्दी पूरी होती हैं और राज्य में बालू की आपूर्ति कब तक व्यापक रूप से सामान्य हो पाती है।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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