डाक्टरों पर FIR : मरीज की मौत पर हुआ बवाल, परिजनों ने मौत पर किया हंगामा, तो डाक्टरों ने जमकर पीटा, जेवरात भी छिन डाले, FIR दर्ज
FIR against doctors: Patient's death sparked uproar; family members created ruckus over death, doctors beat them up, snatched their jewellery, FIR registered

Crime News : मरीज की मौत के बाद अस्पताल में घमासान हो गया। परिजनों ने विवाद किया, तो डाक्टरों की टीम ने परिजनों को घेकर पीट डाला। यही नहीं परिजनो से जेवरात भी छिन लिये। अब इस मामले में एफआईआर दर्ज किया गया है। पूरा मामला बिहार के बेतिया स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) में इलाज के दौरान मरीज की मौत के बाद हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
इलाज के दौरान मां की मौत, विवाद की शुरुआत
घटना 21 जनवरी की रात करीब 8 बजे की बताई जा रही है। विशाल राज अपनी मां सुशीला कुमारी को गंभीर हालत में इलाज के लिए जीएमसीएच बेतिया लेकर पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार, मरीज को ऑक्सीजन मास्क लगाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने बिना ईसीजी जांच किए ही मास्क हटा दिया। जब विशाल राज ने इस पर आपत्ति जताई, तो डॉक्टरों से उनकी बहस हो गई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई।
शराब के नशे और ड्यूटी पर लापरवाही के आरोप
पीड़ित विशाल राज का आरोप है कि घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर शराब के नशे में थे। साथ ही कुछ जूनियर डॉक्टर, जो उस समय ड्यूटी पर नहीं थे, वे भी मौके पर मौजूद थे और उन्होंने विवाद में हस्तक्षेप किया। आरोप है कि डॉक्टरों ने अन्य सहयोगियों और अस्पताल परिसर में मौजूद कथित दलालों व असामाजिक तत्वों को बुलाकर उनके साथ सामूहिक रूप से मारपीट की।
मारपीट और सोने की चेन छीनने का दावा
विशाल राज के अनुसार, मारपीट इतनी बेरहमी से की गई कि वह अधमरी हालत में पहुंच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि हमले के दौरान उनके गले से लगभग एक लाख रुपये मूल्य की सोने की चेन जबरन छीन ली गई। साथ ही गाली-गलौज की गई और उन्हें गंभीर अंदरूनी चोटें आईं, जिनका इलाज वह फिलहाल करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण ही उनकी मां की मौत हुई।
शिकायत में देरी, अब दर्ज हुई एफआईआर
पीड़ित परिवार ने बताया कि मां के निधन के बाद अंतिम संस्कार और पारिवारिक शोक के कारण पुलिस में शिकायत देने में देरी हुई। हालांकि बाद में उन्होंने थाने में आवेदन दिया, जिसके आधार पर अज्ञात डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पीड़ित का कहना है कि घटना के समय कई मरीज, उनके परिजन और अस्पताल कर्मचारी मौके पर मौजूद थे, जो इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी हैं।
जूनियर डॉक्टरों की मनमानी पर सवाल
यह मामला कोई पहला नहीं है। बताया जा रहा है कि बीते एक सप्ताह के भीतर जीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों द्वारा मरीजों के परिजनों के साथ मारपीट की यह दूसरी घटना है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से आम लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जूनियर डॉक्टरों की बदसलूकी और कथित गुंडागर्दी पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।









